आयुर्वेद दिवस पर बिलासपुर में सेमिनार, चिकित्सकों को पंचकर्म और अग्निकर्म का व्यावहारिक प्रशिक्षण

अभिषेक कुमार पाण्डेय
रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़
‘स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद’ थीम पर आयोजित कार्यशाला में म्यूजिक थेरेपी समेत विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी
बिलासपुर, 22 सितंबर 2026। 11वें आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य में जिला आयुष विभाग, बिलासपुर द्वारा ‘स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद’ विषय पर एक दिवसीय सेमिनार एवं कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम में आयुर्वेद की विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी देने के साथ आयुष चिकित्सकों के लिए प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए गए।
कार्यक्रम का आयोजन जिला आयुष अधिकारी डॉ. यशपाल सिंह ध्रुव के मार्गदर्शन में हुआ। विशेषज्ञों ने अलग-अलग विषयों पर व्याख्यान देने के साथ लाइव प्रैक्टिकल डेमोंस्ट्रेशन भी प्रस्तुत किए।
म्यूजिक थेरेपी के उपयोग पर विशेषज्ञ ने रखे विचार
कार्यशाला में डॉ. रश्मि जितपुरे ने म्यूजिक थेरेपी पर जानकारी दी। उन्होंने मानसिक तनाव, अवसाद और जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं में संगीत चिकित्सा की संभावित भूमिका पर चर्चा की।
उन्होंने बताया कि उचित संगीत, लय और ध्वनि के चिकित्सकीय उपयोग से मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन में सहायता मिल सकती है। उन्होंने कारुण्य पैलिएटिव केयर और सुप्रजा जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों में संगीत चिकित्सा के उपयोग का भी उल्लेख किया।
पंचकर्म के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रशिक्षण
डॉ. अनिल सोनी ने पंचकर्म चिकित्सा के विभिन्न आयामों और प्रक्रियाओं की जानकारी दी। उन्होंने अलग-अलग रोग स्थितियों में पंचकर्म के उपयोग, प्रक्रिया से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं और आवश्यक सावधानियों के बारे में प्रतिभागियों को समझाया।
अग्निकर्म और विद्धकर्म का लाइव डेमोंस्ट्रेशन
कार्यशाला के दौरान डॉ. कुमुदिनी पटेल ने दर्द प्रबंधन एवं मस्कुलोस्केलेटल विकारों से जुड़े विषय पर व्याख्यान दिया। इसके साथ ही विद्धकर्म एवं अग्निकर्म का लाइव प्रैक्टिकल डेमोंस्ट्रेशन भी किया गया।
प्रतिभागियों को इन प्रक्रियाओं की तकनीक, उपयोग के संकेत और उपचार के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जानकारी दी गई।
आयुर्वेद को स्वस्थ जीवनशैली से जोड़ने पर जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिला आयुष अधिकारी डॉ. यशपाल सिंह ध्रुव ने कहा कि आयुर्वेद को केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं माना जाना चाहिए। उनके अनुसार स्वस्थ जीवनशैली, रोगों की रोकथाम और समग्र स्वास्थ्य संरक्षण भी आयुर्वेद की महत्वपूर्ण अवधारणाओं में शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि ‘स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद’ की दिशा में चिकित्सकों का निरंतर प्रशिक्षण और व्यावहारिक ज्ञान आवश्यक है। ऐसी कार्यशालाओं से आयुष चिकित्सकों को पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के व्यावहारिक पक्षों को समझने का अवसर मिलता है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
जिलेभर के आयुष स्वास्थ्यकर्मी हुए शामिल
कार्यशाला में जिले के विभिन्न आयुष संस्थानों से आयुष चिकित्सा अधिकारी, स्वास्थ्यकर्मी और संबंधित कर्मचारी शामिल हुए। प्रतिभागियों ने विभिन्न सत्रों में हिस्सा लेकर विशेषज्ञों से व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
कार्यक्रम के माध्यम से आयुर्वेद के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इसे स्वस्थ जीवनशैली के महत्वपूर्ण आधार के रूप में आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया।






