
Chhattisgarh Navratri: मां बम्लेश्वरी देवी और आंगा देव का कराया गया मिलन, तनावपूर्ण स्थिति के बीच मंदिर ट्रस्ट, आदिवासी समाज और प्रशासन की मौजूदगी में संपन्न हुआ आयोजन
डोंगरगढ़। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल डोंगरगढ़ में शारदीय नवरात्र की पंचमी पर आस्था, परंपरा और आदिवासी संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। विश्वप्रसिद्ध मां बम्लेश्वरी धाम में राजपरिवार की अगुवाई में आदिवासी समाज ने पारंपरिक पंचमी भेंट की रस्म निभाई। इस दौरान मां बम्लेश्वरी देवी और आंगा देव का मिलन कराया गया तथा क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की गई।
इस बार का आयोजन विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि पिछले कुछ समय से पंचमी भेंट की परंपरा को लेकर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई थी। इसके बावजूद मंदिर ट्रस्ट समिति, राजपरिवार, आदिवासी समाज और प्रशासन की मौजूदगी में यह धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ।
क्या है पंचमी भेंट की परंपरा?
पंचमी भेंट डोंगरगढ़ में नवरात्र के दौरान निभाई जाने वाली पारंपरिक धार्मिक रस्म है। इस आयोजन में आदिवासी समाज की आस्था और स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। राजपरिवार की अगुवाई में समाज के लोग निर्धारित परंपरा के अनुसार मां बम्लेश्वरी के दरबार में भेंट अर्पित करते हैं।
इस रस्म के दौरान आंगा देव और मां बम्लेश्वरी देवी के मिलन को विशेष महत्व दिया जाता है। श्रद्धालु इसे धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता और क्षेत्र की मंगलकामना से जोड़कर देखते हैं।
आंगा देव और मां बम्लेश्वरी के मिलन का महत्व
स्थानीय धार्मिक परंपराओं में आंगा देव का विशेष स्थान है। पंचमी भेंट के दौरान मां बम्लेश्वरी देवी और आंगा देव का मिलन इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण माना जाता है। इस अवसर पर क्षेत्र में सुख-समृद्धि, अच्छी फसल, शांति और खुशहाली की कामना की जाती है।
यह परंपरा केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय समाज की सांस्कृतिक पहचान और पीढ़ियों से चली आ रही आस्था को भी दर्शाती है।
तनावपूर्ण माहौल के बीच संपन्न हुआ आयोजन
पंचमी भेंट को लेकर पिछले कुछ समय से बनी तनावपूर्ण स्थिति के बीच इस बार आयोजन में मंदिर ट्रस्ट समिति, राजपरिवार, आदिवासी समाज और प्रशासन की सहभागिता महत्वपूर्ण रही। सभी की मौजूदगी में परंपरागत रस्म पूरी की गई।
डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी धाम नवरात्र के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहता है। ऐसे में पंचमी भेंट जैसे आयोजन धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच संवाद और समन्वय के महत्व को भी सामने लाते हैं।
पंचमी भेंट का यह आयोजन डोंगरगढ़ की धार्मिक आस्था, आदिवासी संस्कृति और ऐतिहासिक परंपराओं की जीवंत झलक पेश करता है।






