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SECL प्रभावित परिवारों की गुहार : बरौद खदान विस्तार में छूटे मकानों का सर्वे और मुआवजे की मांग, 60 परिवारों ने कलेक्टर जनदर्शन में सौंपा आवेदन

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रायगढ़। ग्राम बरौद स्थित एसईसीएल बरौद खुली खदान विस्तार परियोजना से प्रभावित 60 परिवारों ने अपने मकानों के सर्वे और मुआवजे की मांग को लेकर जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। प्रभावित परिवारों ने कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन प्रस्तुत कर मांग की है कि छूटे हुए मकानों का पुन: सर्वे कराकर पात्रतानुसार मुआवजा एवं पुनर्वास का लाभ दिलाया जाए।

वास्तविक आवश्यकता के अनुसार बने मकानों के सर्वे से वंचित होने का आरोप

प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि बरौद खुली खदान विस्तार परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान निजी भूमि एवं मकानों का मुआवजा भुगतान किया गया था। लेकिन मुआवजा मूल्यांकन और प्रक्रिया पूरी होने में एक से दो वर्ष का समय लग गया।

ग्रामीणों के अनुसार, इसी अवधि में बढ़ते परिवार और रहने की वास्तविक जरूरत को देखते हुए कई परिवारों ने छोटे-छोटे मकानों का निर्माण किया था। उनका कहना है कि इन मकानों का निर्माण अतिरिक्त मुआवजा प्राप्त करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि पारिवारिक आवश्यकता के कारण किया गया था।

सर्वे नहीं होने से मुआवजे से वंचित रहने का दावा

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि आवश्यकता के अनुसार बनाए गए इन मकानों का सर्वे नहीं किया गया, जिसके कारण आज तक कई परिवार मुआवजे और पुनर्वास योजना के लाभ से वंचित हैं।

प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्होंने कई बार एसईसीएल प्रबंधन और जिला प्रशासन के समक्ष व्यक्तिगत एवं सामूहिक रूप से आवेदन प्रस्तुत किए, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।

2021 में संयुक्त सर्वे के आदेश के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

ग्रामीणों ने बताया कि कार्यालय तहसीलदार, घरघोड़ा द्वारा वर्ष 2021 में मकानों एवं परिवारों के पुन: सर्वे के लिए संयुक्त टीम गठित करने का आदेश जारी किया गया था। इसके बावजूद सर्वे कार्य पूरा नहीं हो सका और बीच में ही रोक दिया गया।

प्रभावित परिवारों का कहना है कि गांव लगभग पूर्ण रूप से विस्थापन की स्थिति में पहुंच चुका है, ऐसे में लंबित मामले का शीघ्र निराकरण जरूरी है।

प्रशासन से निष्पक्ष सर्वे और पुनर्वास लाभ की मांग

कलेक्टर जनदर्शन में दिए आवेदन के माध्यम से प्रभावित परिवारों ने मांग की है कि छूटे हुए एवं आवश्यकता के अनुसार निर्मित मकानों का निष्पक्ष सर्वे कराया जाए और पात्र परिवारों को नियमानुसार मुआवजा तथा पुनर्वास का लाभ दिया जाए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्या का जल्द समाधान नहीं किया गया तो वे अपनी मांगों को लेकर उच्च न्यायालय बिलासपुर में जनहित याचिका दायर करने के लिए बाध्य होंगे।

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