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चक्रधर समारोह के तीसरे दिन ‘रानी दुर्गावती’ की गाथा से गूंजा मंच

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रायगढ़ (छत्तीसगढ़)। अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह के तीसरे दिन दर्शकों को नृत्य और संगीत की विविध विधाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। देश-प्रदेश से आए कलाकारों की प्रस्तुतियों ने समारोह की गरिमा को और ऊँचाई दी।


जबलपुर से आई ऐतिहासिक प्रस्तुति बनी आकर्षण का केंद्र

जबलपुर (मध्यप्रदेश) से आए संस्कार भारती महाकौशल प्रांत की टीम ने अपनी ऐतिहासिक नृत्य नाटिका से दर्शकों के हृदय को गहराई तक छू लिया। नाट्य विधा प्रमुख कमलेश यादव के नेतृत्व में प्रस्तुत नृत्य नाटिका “गोंडवाना की वीरांगना रानी दुर्गावती” समारोह का मुख्य आकर्षण बनी।


रानी दुर्गावती के शौर्य की झलक

मंचन में रानी दुर्गावती के जन्म से विवाह तक की यात्रा और फिर मुगल साम्राज्य के विरुद्ध उनके शौर्यपूर्ण संघर्ष को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

  • कलाकारों ने वीरांगना की अदम्य साहस, पराक्रम और बलिदान को
    • भाव-भंगिमाओं
    • भावपूर्ण संवादों
    • नृत्य और संगीत
      के संगम से इस प्रकार जीवंत कर दिया कि दर्शक भाव-विभोर हो उठे।

देशभक्ति से ओत-प्रोत दृश्य

विशेष रूप से युद्ध के प्रसंग और रानी की वीरता के दृश्य दर्शकों के बीच गहरी छाप छोड़ गए। प्रस्तुति के दौरान हॉल देशभक्ति और गौरव की भावना से गूंज उठा। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।


नृत्य, संगीत और नाट्य का संगम

इस प्रस्तुति ने साबित किया कि नृत्य, संगीत और नाट्य का समन्वय किस प्रकार इतिहास की गाथाओं को जीवंत कर सकता है। रानी दुर्गावती की वीरता का मंचन न केवल मनोरंजन का माध्यम बना, बल्कि दर्शकों को उनके बलिदान और पराक्रम की याद भी दिलाई।

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