प्रदेशभर में तहसीलदारों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू, तहसीलों का कामकाज ठप — 17 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन तेज

रायपुर। प्रदेशभर के तहसीलदार और नायब तहसीलदार आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इससे राज्य की सभी तहसीलों में राजस्व संबंधित कामकाज प्रभावित होने की आशंका है। तहसीलदार संघ ने अपनी 17 सूत्रीय मांगों को लेकर यह कदम उठाया है। इससे पहले संघ ने 28 जुलाई को जिला स्तर पर, 29 जुलाई को संभाग स्तर पर और 30 जुलाई को नवा रायपुर में प्रदेश स्तर पर जोरदार प्रदर्शन कर सरकार को चेतावनी दी थी।
मांगों को लेकर नहीं बनी सहमति, हड़ताल का रास्ता चुना
संघ का कहना है कि सरकार से कई दौर की बातचीत और ज्ञापन सौंपने के बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। अंततः आंदोलन को और तेज करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की गई है।
ये हैं तहसीलदार संघ की प्रमुख मांगें
1. हर तहसील में पर्याप्त स्टाफ की नियुक्ति — कंप्यूटर ऑपरेटर, चपरासी, पटवारी, और राजस्व निरीक्षक की तैनाती की जाए।
2. प्रमोशन प्रक्रिया में पारदर्शिता — डिप्टी कलेक्टर पद पर 50:50 अनुपात में सीधी भर्ती और पदोन्नति बहाल की जाए।
3. नायब तहसीलदार को राजपत्रित अधिकारी का दर्जा — पूर्व में की गई घोषणा को लागू किया जाए।
4. वेतनमान में सुधार — तहसीलदारों के ग्रेड पे और वेतन संरचना में संशोधन किया जाए।
5. सरकारी वाहन और ड्राइवर की सुविधा — सभी तहसीलों को दी जाए।
6. निलंबन मामलों में शीघ्र बहाली — 15 दिनों में जांच पूरी कर पुनः पदस्थापना की जाए।
7. न्यायालयीन प्रकरणों को जनशिकायत की श्रेणी में न रखा जाए।
8. न्यायिक आदेशों पर FIR न हो — जज प्रोटेक्शन एक्ट 1985 के पालन की मांग।
9. प्रोटोकॉल ड्यूटी से अलग न्यायालयीन कार्य की व्यवस्था हो।
10. आउटसोर्सिंग से नियुक्ति का अधिकार तहसीलदार को दिया जाए।
11. तकनीकी कामों के लिए प्रशिक्षित ऑपरेटर की नियुक्ति हो।
12. SLR और ASLR की पुनः नियुक्ति की जाए।
13. सरकारी मोबाइल नंबर उपलब्ध कराए जाएं।
14. हर तहसील में सुरक्षा गार्ड और फील्ड कार्य हेतु वाहन मिले।
15. सड़क दुर्घटना में त्वरित मुआवजा देने की गाइडलाइन बने।
16. संघ को सरकारी मान्यता मिले — ताकि वार्ता और नीतिगत निर्णयों में भागीदारी हो सके।
17. राजस्व न्यायालय सुधार हेतु विशेषज्ञ समिति गठित की जाए।
कामकाज ठप होने की आशंका
तहसीलदारों की हड़ताल से नामांतरण, सीमांकन, जाति, आय, निवास प्रमाण पत्र जैसी दैनिक सेवाएं प्रभावित होंगी। साथ ही कोर्ट संबंधी मामलों में सुनवाई और निपटारे भी रुके रहेंगे।
संघ ने साफ कहा है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को मानकर स्पष्ट निर्णय नहीं लेती, हड़ताल जारी रहेगी। ऐसे में आम जनता को आवश्यक दस्तावेजों और कार्यों के लिए असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार की चुप्पी पर सवाल
संघ ने आरोप लगाया है कि बार-बार अनुरोध और चेतावनी के बावजूद सरकार ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, जिससे कर्मचारी वर्ग में गहरा असंतोष है।












