एफसीआई चावल कोटा संकट: जमा में देरी, कन्वर्जन की तैयारी

पिछले वर्ष की तरह इस बार भी खाद्य निगम (FCI) का कोटा बढ़ा दिया गया है। हालांकि आवंटन में देरी के कारण अब चावल जमा करने की प्रक्रिया शुरू हो पाई है। वर्ष 2024-25 में खरीदे गए धान का चावल यदि रिजेक्ट हुआ तो राइस मिलर्स इसे जमा नहीं करेंगे। नवंबर के बाद नया चावल खरीदी सत्र शुरू होगा, जिसके साथ एफसीआई से नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) में कन्वर्जन का सिलसिला भी शुरू होगा और इस दौरान अवैध वसूली के मामले सामने आने की आशंका है।
मार्कफेड की कस्टम मिलिंग नीति लगातार विफल साबित हो रही है। हर साल खरीदे गए धान की मिलिंग उसी सत्र में पूरी नहीं हो पाती, जिससे पुराने आवंटन की पेंडेंसी बनी रहती है। उदाहरण के तौर पर, वर्ष 2023-24 में खरीदे गए धान की मिलिंग महज तीन महीने पहले पूरी हुई है। एफसीआई को आवंटित चावल समय पर जमा न होने पर उसे नागरिक आपूर्ति निगम में कन्वर्ट कर दिया गया, और इस प्रक्रिया में प्रति क्विंटल 15 से 27 रुपये तक की अवैध वसूली हुई।
सूत्रों के मुताबिक, खाद्य विभाग, मार्कफेड और नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारी इस पूरे खेल में शामिल हैं। इस बार भी 2024-25 के सरप्लस धान को नीलामी से रोककर एफसीआई के लिए डीओ जारी किए जा रहे हैं। राइस मिलर्स नवंबर तक पुराने धान का चावल एफसीआई में जमा करेंगे, लेकिन नए सत्र के शुरू होने से पहले यह मुश्किल है। ऐसे में 2024-25 का चावल अब 2025-26 में जमा होने की संभावना है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि कस्टम मिलिंग में भ्रष्टाचार खत्म होना लगभग असंभव है, क्योंकि हर सरकार अपने हिसाब से इसमें रास्ता निकाल लेती है। वर्तमान में जारी एफसीआई डीओ से चावल जमा न हो पाने की स्थिति में फिर से NAN में कन्वर्जन किया जाएगा और इसके बदले प्रति क्विंटल वसूली तय होगी।












