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चक्रधर समारोह में गूँजी डॉ. कुमार विश्वास की काव्यधारा, श्रोतागण हुए भावविभोर

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रायगढ़। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह के मंच पर रविवार की शाम साहित्य और सुरों का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुप्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास ने अपनी ओजस्वी वाणी और भावपूर्ण काव्य पाठ से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

डॉ. विश्वास ने जब अपनी लोकप्रिय रचना “तुझी से शाम हो जाना, तुझी से भोर हो जाना…” सुनाई तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उनकी मार्मिक पंक्तियाँ “मिले हर ज़ख्म को मुस्कान से सीना नहीं आया, अमरता चाहते थे पर ज़हर पीना नहीं आया…” ने दर्शकों की आँखें नम कर दीं। वहीं उनकी प्रसिद्ध रचना “कोई दीवाना कहता है, कोई पागल कहता है…” पर उपस्थित जनसमूह ने उत्साहपूर्वक तालियाँ बजाकर कवि का अभिवादन किया।

व्यंग्य, शेरो-शायरी और सहज शैली से उन्होंने कार्यक्रम को और भी रोचक बना दिया। उनके साथ युवा गीतकार गौरव साक्षी, वीर रस के कवि ईशान देव, हास्य कवि दिनेश गौरवा और कवयित्री अल्पना आनंद ने भी अपनी-अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं का दिल जीत लिया।

समारोह में मौजूद साहित्यप्रेमियों ने डॉ. कुमार विश्वास की कविताओं को न केवल सुना बल्कि उन्हें आत्मसात भी किया। पूरा माहौल काव्य और साहित्य रस से सराबोर हो गया।

चक्रधर समारोह का यह कवि सम्मेलन श्रोताओं के लिए सचमुच एक अविस्मरणीय अनुभव साबित हुआ।

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