“संस्कृति और परंपरा बचाना हम सबका कर्तव्य : रायगढ़ में बोले पद्मश्री कैलाश खेर”

रायगढ़ । चक्रधर समारोह के समापन अवसर पर रायगढ़ पहुंचे पद्मश्री गायक कैलाश खेर ने शनिवार को होटल ट्रिनिटी में आयोजित प्रेस वार्ता में पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा – “जो जगता है वही जगाता है, और जो जुड़ता है वही जोड़ता है। यदि आप प्रकाशित हो जाएं तो दूसरों को भी प्रकाशित करें।”
कैलाश खेर ने शुक्रवार रात हुए अपने कार्यक्रम को याद करते हुए कहा कि चक्रधर समारोह में आना अपने आप में अद्भुत अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय संगीत की जड़ें लोकसंगीत में हैं और यही हमारी असली पहचान है। पढ़े-लिखे लोग शास्त्रीय संगीत को अधिक समझते हैं, जबकि गांव और कस्बों के लोग लोकधुनों से जुड़ते हैं। “संगीत भारत की रग-रग में बसा है, यहां तक कि भीख मांगने वाला भी गाकर मांगता है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने कहा कि चक्रधर जैसे बड़े आयोजनों को लगातार होना चाहिए, जिससे कलाकारों को मंच मिल सके। लेकिन इसके साथ जनता की भागीदारी भी जरूरी है। “सरकार और सरोकार मिल जाएं तो चमत्कार हो सकता है। सरकार अपना काम कर रही है, लेकिन जनता को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी,” कैलाश खेर ने कहा।
नई पीढ़ी के विषय पर उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि माता-पिता ही बच्चों को कॉन्वेंट शिक्षा की ओर धकेल रहे हैं, जिससे परंपराएं कमजोर हो रही हैं। “पहले हमारे यहां गुरुकुल, बड़ों का सम्मान और पैर छूने की परंपरा थी। आज बुजुर्गों को वृद्धाश्रम भेजा जा रहा है। नई पीढ़ी को संभालने की जिम्मेदारी बुजुर्गों की भी है,” उन्होंने कहा।
रियलिटी शो से जुड़े सवाल पर कैलाश खेर ने कहा कि वहां कोई कलाकार गायब नहीं होता, बल्कि मंच मिलने के बाद आगे का सफर उसकी मेहनत पर निर्भर करता है। टीवी पर दिखने से लोग मान लेते हैं कि कलाकार शीर्ष तक पहुंच जाएगा, जबकि सफलता की यात्रा लंबी होती है।
खुद के जीवन से जुड़ा एक प्रसंग साझा करते हुए उन्होंने बताया कि घर छोड़ते वक्त मां ने उनसे पूछा था कि अब गाजर का हलवा और कलाकंद कहां से मिलेगा, तब उन्होंने तय किया कि अब मीठा ही नहीं खाएंगे। उन्होंने कहा – “खट्टा, मीठा और ठंडा छोड़ देने से ही आज हमारा शरीर इतना मजबूत है कि लगातार यात्राएं और शो कर पाता हूं।”
उन्होंने बताया कि पिछले दस वर्षों से वे अपने जन्मदिन पर नए गायकों को मंच दे रहे हैं। “भारत में आज तक किसी गायक ने गायक को लॉन्च नहीं किया, हम वह कर रहे हैं। सफलता की पहली सीढ़ी असफलता होती है, बिना संघर्ष के कोई भी सफल नहीं हो सकता,” कैलाश खेर ने कहा।












