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रायगढ़ में कोल डिपो और रेलवे साइडिंग पर खनिज विभाग का नियंत्रण कमजोर, कोल माफिया सक्रिय

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रायगढ़। जिले में कोल डिपो और रेलवे साइडिंग पर खनिज विभाग का नियंत्रण अब लगभग खत्म हो गया है। इसका फायदा उठाकर कोल माफिया धड़ल्ले से काम कर रहे हैं। कोयले में छाई मिलाकर चोरी की जा रही है और जांच न होने की वजह से यह सबकुछ बेखौफ तरीके से चल रहा है। खनिज विभाग की लापरवाही के कारण रायगढ़ जिले में कोयले की अफरा-तफरी पर रोक लगाना मुश्किल साबित हो रहा है।

सूत्रों के अनुसार जिले में करीब 12 कोल डिपो सक्रिय हैं। इन डिपो से वाहनों में लोड किए जाने वाले कोयले में मिक्सिंग कर प्लांट तक भेजा जाता है। वहीं, वॉशरी में रिजेक्ट कोल के नाम पर भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की जा रही है। कोरबा, अंबिकापुर और ओडिशा से आने वाली गाड़ियों को डिपो या किसी प्लॉट में रोककर मिलावट की जाती है और फिर लोडिंग कर रवाना कर दिया जाता है।

नए डिपो भी शामिल
अब रायगढ़ के आउटर रोड पर स्थापित नए डिपो भी इस काम में शामिल हो गए हैं। यहां आसानी से कोयला डंप किया जाता है और मिलावट के बाद बेच दिया जाता है। यह पूरा कारोबार कच्चे में चलता है। डिपो में कोयले का कोई ब्योरा उपलब्ध नहीं होता।

रेलवे साइडिंग में भी ठेकेदारों की मिलीभगत से शातिर तरीके से गड़बड़ी हो रही है। लोडिंग के समय मिक्सिंग कर अतिरिक्त कोयला बचाकर खुले बाजार में बेचा जाता है। खनिज विभाग ने इन पर पूरी तरह से आंखें मूंद रखी हैं। डिपो में जांच तक नहीं की जाती और केवल ऑनलाइन टीपी जारी करने की औपचारिकता पूरी की जाती है।

कंपनियों और पर्यावरण को नुकसान
मिलावटी कोयले से कंपनियों को भारी नुकसान होता है और पर्यावरण पर भी विपरीत असर पड़ता है। खराब क्वालिटी वाले कोयले से राखड़ उत्सर्जन अधिक होता है, जिससे प्रदूषण और बढ़ जाता है।

पूर्व में हुई थी जांच
पूर्व में कोरबा, जांजगीर-चांपा, बिलासपुर और रायगढ़ के कई कोल डिपो पर छापेमारी की गई थी। रायगढ़ जिले में केएल एनर्जी देहजरी, भाटिया एनर्जी छोटे डुमरपाली खरसिया, शिव शक्ति स्टील चक्रधरपुर रायगढ़, नवदुर्गा फ्यूल्स बरपाली तमनार, सारडा एनर्जी तमनार और फिल कोल बेनीफिकेशन नवापारा टेंडा में जांच की गई थी। जांच टीम में खनिज, राजस्व और जीएसटी विभाग के अधिकारी शामिल थे। हालांकि, कार्रवाई के नाम पर पेनाल्टी लगाकर मामलों को रफा-दफा कर दिया गया।

रायगढ़ में कोयले के इस अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए सख्त निगरानी और नियमित जांच की आवश्यकता है, अन्यथा यह समस्या और गंभीर होती जाएगी।

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