शारदेय क्वांर नवरात्रि महापर्व: आस्था और भक्ति का अनुपम संगम

रायगढ़। शारदेय क्वांर नवरात्रि महापर्व को शहर में श्रद्धा और धूमधाम से मनाने की परंपरा रही है, जिसकी प्रसिद्धि पूरे जिले में है। नवरात्रि के प्रथम दिन से ही मंदिरों में माता भवानी के भक्तगण कठोर व्रत और नियमों का पालन करते हुए अपनी मनोरथ पूरी करने आस्था के दीप जलाकर माता की आराधना में पवित्र मन से आठों पहर समर्पित रहते हैं।
सप्तमी से महानवमी तक शहर के विभिन्न स्थानों में बेहद खूबसूरत पंडाल बनाए जाते हैं। इन पंडालों की शोभा मन को स्वर्गीय अहसास कराती है और हर दर्शक व श्रद्धालु को आध्यात्मिक आनंद से सराबोर कर देती है। इस वर्ष भी विगत 22 सितंबर से शारदेय क्वांर नवरात्रि महापर्व प्रारंभ हुआ और माता जगतजननी के सभी मंदिर आस्था की ज्योति से जगमगा रहे हैं। नियमित पूजा-अर्चना विधि विधान के अनुसार हो रही है।
शहर में लगभग 35 से अधिक स्थानों पर लाल किला, केदारनाथ, मंदिर या कलश जैसे भव्य और आकर्षक पंडाल सजाए गए हैं। यहाँ माता जगतजननी विराजित हैं और महानवमी तक वैदिक परंपरा अनुसार पूजा-अर्चना जारी रहेगी। अनेक स्थानों पर महापर्व के पहले ही दिन से गरबा के मधुर भक्ति गीतों के साथ लोग पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर देर रात तक माता भवानी की आराधना में लीन हैं। शहर सर्वत्र जय माँ अंबे, जय माँ जगदंबे के गीतों से गुंजायमान है।
नवरात्रि के पहले दिन से ही शहर के बूढ़ी माई, समलाई माता, पहाड़ मंदिर, काली माता मंदिर, दुर्गा माता मंदिर (चक्रधर नगर), बंजारी माता मंदिर सहित सभी माता जगतजननी के मंदिरों में श्रद्धालु वैदिक परंपरा अनुसार ज्योति कलश प्रज्ज्वलित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर रहे हैं। सुबह से शाम तक मंदिरों में दर्शन पूजन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। इस महापर्व की खुशी बच्चों में भी देखने को मिल रही है।
शारदेय क्वांर नवरात्रि महापर्व न केवल आस्था और भक्ति का पर्व है, बल्कि यह शहरवासियों के बीच भाईचारे, उत्साह और सांस्कृतिक पहचान का भी प्रतीक बन चुका है।












