फ्लोरामैक्स कंपनी का बड़ा घोटाला: रायगढ़ में सैकड़ों महिलाओं से करोड़ों की ठगी, एसटी आयोग ने मांगी रिपोर्ट

रायगढ़। जिले में फ्लोरामैक्स कंपनी द्वारा महिलाओं को झांसा देकर किए गए कथित बड़े धोखाधड़ी मामले ने तूल पकड़ लिया है। सैकड़ों आदिवासी और ग्रामीण महिलाओं के नाम पर लाखों के लोन निकलवाकर रकम को कंपनी के खातों में जमा करवाने का आरोप सामने आया है। इस घोटाले में करोड़ों रुपये हड़पे जाने की आशंका है।
मामला प्रकाश में आने के बाद अब अनुसूचित जनजाति आयोग ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव से विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट तलब की है। वहीं दूसरी ओर रायगढ़ में प्रशासन और पुलिस की चुप्पी को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं।
कैसे हुआ पूरा स्कैम?
फ्लोरामैक्स कंपनी ने रायगढ़ और कोरबा की तर्ज पर धरमजयगढ़ क्षेत्र में भी अपने एजेंटों के जरिए नेटवर्क तैयार किया।
- कंपनी के मैनेजर अखिलेश सिंह और स्थानीय सहयोगियों ने महिलाओं को सदस्य बनाने के नाम पर जोड़ा।
- चैनपुर, सिथरा, जबगा, जमाबीरा और आसपास के गांवों की कम पढ़ी-लिखी महिलाओं को आसान कमाई का लालच दिया गया।
- प्रत्येक महिला के नाम पर करीब 30,000 रुपये का लोन बैंक से स्वीकृत करवाया गया।
- लेकिन राशि महिलाओं तक पहुंची ही नहीं, उसे सीधे कंपनी के खातों में जमा करा दिया गया।
जब बैंकों के नोटिस महिलाओं के घर पहुंचे, तब जाकर धोखाधड़ी का पर्दाफाश हुआ।
शुरुआत कहां से खुली?
चैनपुर और सिथरा गांव की कुछ महिलाओं ने मामला समझते ही शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद यह स्कैम सामने आया।
नवंबर 2024 में दर्ज एफआईआर में करीब 50 लाख रुपये की ठगी का उल्लेख है, हालांकि गांवों में पीड़ितों की संख्या को देखते हुए धोखाधड़ी की राशि इससे कहीं अधिक होने की संभावना है।
किनके खिलाफ दर्ज हुआ मामला?
पुलिस ने निम्न आरोपियों पर केस दर्ज किया था—
- अखिलेश सिंह
- राजू सिंह
- गुडिया सिंह
- बलराम बंजारा
- श्याम सिंह
- मंजू चौहान
मामला धारा 3(5), 318(2), 318(4), 336 और 338 के तहत दर्ज किया गया।
लेकिन जांच ठहर क्यों गई?
एफआईआर दर्ज होने के बावजूद—
- पुलिस ने कितनी महिलाएं प्रभावित हुईं, इसका सर्वे नहीं किया
- राशि की वास्तविक कुल हेराफेरी का आंकलन नहीं हुआ
- न ही नोडल बैंक और कंपनी के स्तर पर लेन-देन की रिपोर्ट सार्वजनिक हुई
इसी सुस्ती पर अब एसटी आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है।
ग्रामीणों की मांग
- सभी पीड़ित महिलाओं की सूची तैयार की जाए
- लोन की वसूली तुरंत रोकी जाए
- दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो
- प्रभावित महिलाओं को सरकारी राहत और कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाए












