धरमजयगढ़ में सीमेंट फैक्ट्री का विरोध तेज, ग्रामीणों ने जिला मुख्यालय में दिया धरना – जनसुनवाई निरस्त करने की मांग पर अड़े

रायगढ़। धरमजयगढ़ ब्लॉक में प्रस्तावित सीमेंट फैक्ट्री को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार उग्र होता जा रहा है। गुरुवार को सात गांवों के सैकड़ों ग्रामीण महिला-पुरुष और युवाओं के साथ रैली की शक्ल में जिला मुख्यालय पहुंचे और 11 नवंबर को होने वाली जनसुनवाई को तत्काल रद्द करने की मांग की।
इस आंदोलन को धरमजयगढ़ विधायक लालजीत राठिया और खरसिया विधायक उमेश पटेल का समर्थन भी मिला। विरोध प्रदर्शन दोपहर से शुरू होकर शाम तक चलता रहा। कलेक्टोरेट में बड़ी संख्या में पुलिस बल और एंबुलेंस तैनात थीं।
ग्रामीणों ने कलेक्टर से सीधे मुलाकात की मांग की, लेकिन उनकी ओर से एडिशनल कलेक्टर को भेजा गया। इससे नाराज़ ग्रामीण कलेक्टर से मिलने पर अड़े रहे। देर रात 11 बजे प्रशासनिक अधिकारी—एडिशनल कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार—विधायकों और ग्रामीणों से चर्चा के लिए पहुंचे।
विधायकों ने सवाल उठाया कि बिना ग्राम सभा की सहमति के जनसुनवाई तय कैसे कर दी गई? उन्होंने मांग की कि लिखित में आश्वासन दिया जाए कि जनसुनवाई में केवल प्रभावित गांवों के लोग ही शामिल होंगे। लेकिन प्रशासन आश्वासन देने से बचता रहा और अधिकारी बिना निर्णय के लौट गए।
खुले आसमान के नीचे गुजारी रात
कलेक्टर से मुलाकात नहीं होने पर ग्रामीणों ने सड़क किनारे ही रात भर डेरा डाल दिया। शुक्रवार को भी प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। दोपहर बाद कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी ग्रामीणों के बीच पहुंचे। परंतु मांग पूरी न होने पर ग्रामीण अपने गांव वापस लौट गए।
ग्रामीणों की चेतावनी
ग्रामीणों ने साफ कहा है कि वे जनसुनवाई स्थल पर फिर से बड़ी संख्या में पहुंचेंगे और सीमेंट फैक्ट्री के खिलाफ कड़ा विरोध करेंगे। उनका कहना है कि –
“किसी भी कीमत पर हम अपनी जल-जंगल-जमीन निजी कंपनियों के हाथों नहीं जाने देंगे।”












