जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी तेज रफ़्तार में: 19 दिनों में 3.24 लाख क्विंटल से अधिक खरीदी, किसानों के खातों में 62.95 करोड़ रुपये जारी — सुविधाओं और पारदर्शिता से किसान उत्साहित

राज्य शासन के निर्देशों के अनुरूप जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी सुचारू, पारदर्शी और पूरी तरह व्यवस्थित तरीके से जारी है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के प्रभावी मार्गदर्शन तथा नोडल अधिकारियों और समितियों की सतत निगरानी का परिणाम है कि धान खरीदी कार्य इस वर्ष तेज़ी से गति पकड़ चुका है।
खरीदी केंद्रों में बेहतर सुविधाएँ, त्वरित भुगतान और तकनीकी व्यवस्था से किसानों में उत्साह और विश्वास का माहौल है।
19 दिनों में 3,24,834.80 क्विंटल धान की खरीदी
जिले में धान खरीदी सत्र के 19वें दिन तक—
- 3,24,834.80 क्विंटल धान खरीदा जा चुका है
- 2,891 सीमांत, 1,661 लघु, और 1,486 दीर्घ किसानों ने अब तक धान विक्रय किया है
- किसानों को भुगतान के रूप में अब तक 6,295.71 लाख रुपये (62.95 करोड़) ऑनलाइन हस्तांतरित किए जा चुके हैं
यह त्वरित भुगतान न केवल किसानों के लिए राहत है, बल्कि खरीदी प्रणाली में उनका भरोसा और मज़बूत कर रहा है। किसान इस राशि का उपयोग घर निर्माण, विवाह, कृषि यंत्र खरीदने, पुराने कर्ज चुकाने और वाहन खरीदने जैसे कार्यों में कर रहे हैं।
खरीदी केंद्रों की सुविधाएं—किसानों का विश्वास बना मज़बूत
जामगांव के किसान रोहित
उन्होंने बताया कि उपार्जन केंद्र में—
- पेयजल
- बैठने की सुविधा
- बारदाना
- हमालों की उपलब्धता
- और सटीक तौल मशीनें
जैसी सभी मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
उन्होंने 5.60 क्विंटल धान बेचा और उन्हें ₹13,266.40 का भुगतान तुरंत मिल गया।
कुकुर्दा के किसान शुकलाम्बर
उन्होंने कहा कि इस वर्ष धान खरीदी बिल्कुल सुचारू और सहज रही।
उन्होंने तुंहर टोकन मोबाइल ऐप के माध्यम से घर बैठे ही टोकन प्राप्त किया, जिससे—
- अनावश्यक भीड़
- प्रतीक्षा
- और असुविधा
से पूरी तरह मुक्ति मिली।
उन्होंने 38.90 क्विंटल धान बेचा और ₹91,917.20 की राशि प्राप्त की।
दोनों किसानों ने सरकार की व्यवस्था को भरोसेमंद और पारदर्शी बताते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया।
1,257.74 लाख रुपये की ऋण वसूली, 113.1564 हेक्टेयर रकबा समर्पित
- सहकारी संस्थाओं और बैंकों ने धान खरीदी राशि से 1,257.74 लाख रुपये की ऋण वसूली की है
- रकबा समर्पण प्रक्रिया जारी है, जिसमें अब तक 113.1564 हेक्टेयर भूमि किसानों द्वारा समर्पित की गई है
- भुगतान की प्रगति की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है
- कलेक्टर स्वयं समितियों की नियमित समीक्षा कर रहे हैं
- सुरक्षा व्यवस्था, भौतिक सत्यापन, तौल, भुगतान—सभी पहलुओं पर कड़ी निगरानी












