कांग्रेस नेता जीवन ठाकुर की मौत से उबाल: पारदर्शिता पर सवाल, परिवार और आदिवासी समाज का प्रशासन के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन

कांकेर के कांग्रेस नेता जीवन ठाकुर की मौत ने राजनीतिक और सामाजिक माहौल को झकझोर दिया है। कुछ दिनों पहले उन्हें कांकेर जिला जेल से रायपुर सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया गया था—और वह भी परिवार को बिना किसी सूचना के। अब रायपुर सेंट्रल जेल में उनकी मौत के बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया है।
परिवार और आदिवासी समाज का आरोप – “सच छिपाया गया, जानकारी दबाई गई”
परिजनों का कहना है कि—
- उन्हें जेल शिफ्टिंग की जानकारी तक नहीं दी गई,
- न ही स्वास्थ्य या सुरक्षा से जुड़ी कोई सूचना दी गई,
- और अचानक मौत की खबर ने पूरे परिवार को हिलाकर रख दिया।
आदिवासी समाज और परिवार ने इस घटना को जेल प्रशासन की गंभीर लापरवाही बताया है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि “यह मामला केवल मौत का नहीं, बल्कि अधिकारों और जानकारी छिपाने का है।”
कलेक्ट्रेट परिसर में भारी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन किया और न्याय की मांग की।
विरोध बढ़ा तो जेलर हटाया गया — लेकिन समाज ने कार्रवाई को अपर्याप्त बताया
बढ़ते हंगामे के बाद प्रशासन ने कांकेर जिला जेल के जेलर को हटाने की कार्रवाई की।
लेकिन आदिवासी समाज और परिवार का कहना है कि—
- यह कदम बेहद मामूली है,
- केवल एक अधिकारी हटाने से न्याय नहीं मिलेगा,
- सभी जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
शव लेने से इनकार — “पहले दोषियों पर कार्रवाई, फिर अंतिम संस्कार”
कलेक्ट्रेट में जुटे लोगों ने साफ कहा:
“जब तक सभी जिम्मेदार अधिकारियों पर निलंबन और सख्त कार्रवाई नहीं होती, हम शव नहीं लेंगे।”
प्रदर्शनकारियों की मांग:
- मौत किन परिस्थितियों में हुई—इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जाए
- मामले की निष्पक्ष जांच हो
- दोषियों पर तुरंत कार्रवाई की जाए
प्रशासन का दावा — पोस्टमार्टम रिपोर्ट और दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं
जिला प्रशासन और पुलिस ने कहा कि—
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट
- जेल रिकॉर्ड
- और प्रारंभिक जांच दस्तावेज
इकट्ठा किए जा रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि तथ्यों के सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन परिवार और समाज का विश्वास अभी भी डगमगाया हुआ है।












