बसना क्षेत्र में धान खरीदी व्यवस्था पर बड़ा सवाल, कुरचुंडी उपार्जन केंद्र में अनियमितता उजागर

बसना विकासखंड के धान खरीदी केंद्र कुरचुंडी में धान उपार्जन के दौरान गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। जांच में धान की भारी कमी पाए जाने के बाद जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक शाखा गढ़फुलझर के मैनेजर ने बसना थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिस पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर लिया है।
तहसीलदार के निर्देश पर हुआ आकस्मिक निरीक्षण, संयुक्त दल ने की स्टॉक की जांच
प्राप्त जानकारी के अनुसार 23 जनवरी को तहसीलदार बसना के निर्देशानुसार राजस्व एवं मंडी विभाग के संयुक्त दल द्वारा धान उपार्जन केंद्र कुरचुंडी का आकस्मिक निरीक्षण और भौतिक सत्यापन किया गया। इस दल में राजस्व निरीक्षक, पटवारी और मंडी सचिव शामिल थे।
रिकॉर्ड और मौके के स्टॉक में बड़ा अंतर, जांच में खुली गड़बड़ी
निरीक्षण के दौरान जब रिकॉर्ड के अनुसार दर्ज स्टॉक (बुक स्टॉक) की तुलना मौके पर मौजूद धान (फिजिकल स्टॉक) से की गई, तो चौंकाने वाला अंतर सामने आया। रिकार्ड के मुताबिक केंद्र में 52,958 बोरा (21,183.20 क्विंटल) धान होना चाहिए था।
मौके पर 3,325 बोरा धान कम, सरकार को 41 लाख से अधिक की क्षति
भौतिक सत्यापन में पाया गया कि मोटा और सरना धान मिलाकर केवल 49,633 बोरा (19,853.20 क्विंटल) धान ही मौजूद था। इस प्रकार 3,325 बोरा धान की कमी पाई गई, जिससे सरकार को करीब 41 लाख 23 हजार रुपये की आर्थिक क्षति होना सामने आया है।
जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई, एसडीएम ने भेजा संशोधित ज्ञापन
जांच के आधार पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बसना द्वारा उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं, जिला महासमुंद को कार्रवाई हेतु संशोधित ज्ञापन भेजा गया है, ताकि जिम्मेदारों पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जा सके।
धान उपार्जन केंद्र प्रभारी के खिलाफ एफआईआर, पुलिस जांच में जुटी
मामले की शिकायत के बाद बसना पुलिस ने धान उपार्जन केंद्र प्रभारी क्षेमानिधी साव के विरुद्ध धारा 316(5) BNS के तहत एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान अन्य जिम्मेदारों की भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी।
धान खरीदी व्यवस्था पर फिर उठे सवाल, किसानों के हितों से जुड़ा गंभीर मामला
इस प्रकरण ने एक बार फिर धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों और आम जनता की नजर अब इस बात पर टिकी है कि जांच के बाद दोषियों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है।






