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बस्तर संभाग के किसानों के लिए राहत: धान खरीदी की अवधि बढ़ाई गई, 83,255 मीट्रिक टन अतिरिक्त उठाव

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बस्तर। धान खरीदी की निर्धारित अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद भी प्रदेश के लाखों किसान अपनी उपज बेचने में असमर्थ थे। इससे किसान समुदाय में असंतोष और चिंता की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। विभिन्न क्षेत्रों से यह शिकायतें सामने आई थीं कि समय-सीमा के कारण खरीदी केंद्रों तक पहुंच बनाना मुश्किल हो रहा है।

सरकार ने लिया किसान हितैषी निर्णय

किसानों की मांग और वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने धान खरीदी की अवधि दो अतिरिक्त दिनों के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया। इस कदम से विशेष रूप से बस्तर संभाग के किसानों को राहत मिली, जहां बड़ी संख्या में किसान पहले खरीदी से वंचित रह गए थे।
अतिरिक्त दिनों में बढ़ी खरीदी की गतिविधि

अतिरिक्त दो दिनों की अवधि में बस्तर संभाग के सातों जिलों में खरीदी केंद्रों पर तेज गतिविधि देखने को मिली। सैकड़ों किसान इन दिनों में केंद्रों तक पहुंचकर अपनी उपज बेच सके। इस अवधि में कुल 121 मिलों के माध्यम से धान का अतिरिक्त उठाव संभव हुआ। यह साबित करता है कि थोड़ी समय-सीमा में राहत किसानों के लिए कितनी महत्वपूर्ण है।

बस्तर संभाग में 83,255.23 मीट्रिक टन अतिरिक्त धान खरीदी

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अतिरिक्त दो दिनों में बस्तर संभाग में कुल 83,255.23 मीट्रिक टन धान खरीदी गई।

जिलेवार खरीदी का विवरण

बस्तर: 79 खरीदी केंद्रों से 6,486 मीट्रिक टन

बीजापुर: 30 केंद्रों से 3,069.80 मीट्रिक टन

दंतेवाड़ा: 15 केंद्रों से 5,663 मीट्रिक टन

कांकेर: 149 केंद्रों से सर्वाधिक 49,971.20 मीट्रिक टन

कोंडागांव: 67 केंद्रों से 5,236.24 मीट्रिक टन

नारायणपुर: 17 केंद्रों से 5,815.29 मीट्रिक टन

सुकमा: 25 खरीदी केंद्रों से 7,013.70 मीट्रिक टन

कुल मिलाकर 382 केंद्रों से हुआ अतिरिक्त उठाव

इस प्रकार बस्तर संभाग के सातों जिलों में कुल 382 खरीदी केंद्रों के माध्यम से 83,255.23 मीट्रिक टन धान का अतिरिक्त उठाव किया गया। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि यदि किसानों को समय और सुविधा मिले, तो वे व्यवस्थित रूप से अपनी उपज का विक्रय कर सकते हैं।

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