भारत के पहले स्वर्ण पदक विजेता रणधीर सिंह का निधन, खेल जगत में शोक की लहर

Randhir Singh passes away: एशियाई खेलों में निशानेबाजी में भारत के पहले स्वर्ण पदक विजेता रणधीर सिंह का बुधवार (27 मई) का 79 साल की उम्र में निधन हो गया. कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद उन्होंने नई दिल्ली में अपने आवास पर अंतिम सांस ली.
स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं के कारण सिंह ने हाल में एशियाई ओलंपिक परिषद (ओसीए) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. उन्हें 2024 में चार साल के कार्यकाल के लिए चुना गया था. वे भारत के पहले एशियाई खेलों के शूटिंग स्वर्ण पदक विजेता और अनुभवी खेल प्रशासक थे, जिनकी विरासत पांच ओलंपिक खेलों तक फैली हुई थी. उनके परिवार में उनकी पत्नी विनीता और बेटियां महिमा, सुनैना और राजेश्वरी हैं.
खेल करियर में पांच ओलंपिक
पटियाला के पूर्व शाही परिवार में जन्मे और पूर्व महाराजा भूपिंदर सिंह के वंशज, रणधीर सिंह ने शूटिंग में अपनी बेहतरीन परफॉर्मेंस से भारतीय खेल जगत में अपनी एक अलग पहचान बनाई. उनके शानदार खेल करियर में पांच ओलंपिक में भागीदारी और 1978 के बैंकॉक एशियाई खेलों में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक शामिल था. इस उपलब्धि के लिए उन्हें 1979 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
रणधीर सिंह का ओलंपिक सफर
रणधीर सिंह का ओलंपिक सफर कई दशकों तक चला। टोक्यो 1964 में वे भारत के दल में एक रिजर्व शूटर के तौर पर शामिल थे, जिसके बाद उन्होंने मेक्सिको 1968, म्यूनिख 1972, मॉन्ट्रियल 1976, मॉस्को 1980 और लॉस एंजिल्स 1984 के ओलंपिक खेलों में हिस्सा लिया।
रणधीर सिंह का प्रशासनिक करियर
खेलों की तरह ही अपने सफल प्रशासनिक करियर में उन्होंने भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के महासचिव और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के सदस्य के रूप में भी कार्य किया.
सिंह ने 1987 से 2010 तक भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के महासचिव के रूप में कार्य किया, और 2001 से 2014 के बीच अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) में भी कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दीं. वर्ष 2003 में, उन्होंने विश्व डोपिंग-रोधी एजेंसी (WADA) में IOC का प्रतिनिधित्व भी किया, जिससे वैश्विक खेल प्रशासन के क्षेत्र में उनकी प्रतिष्ठा और भी मजबूत हुई.
भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ ने दी श्रद्धांजलि
भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (NRAI) के सचिव राजीव भाटिया ने कहा, ‘गहरे दुख के साथ हम राजा रणधीर सिंह के निधन की दुखद खबर साझा कर रहे हैं जो आज 27 मई 2026 को स्वर्ग सिधार गए.’ उन्होंने कहा, ‘एक विशिष्ट ओलंपियन, अर्जुन पुरस्कार विजेता और भारत, एशिया और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति में सबसे सम्मानित खेल प्रशासकों में से एक राजा रणधीर सिंह ने निशानेबाजी खेल और ओलंपिक आंदोलन के विकास में अमूल्य योगदान दिया.’
भाटिया ने कहा, ‘एनआरएआई और पूरा निशानेबाजी समुदाय इस अपूरणीय क्षति पर शोक व्यक्त करता है और उनके परिवार तथा प्रियजनों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करता है. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे.’
बेटी पिता की विरासत को आगे बढ़ा रही
रणधीर सिंह की विरासत को उनका परिवार आगे बढ़ा रहा है. उनकी बेटी राजेश्वरी सिंह ने भी शूटिंग के क्षेत्र में कदम रखा है. उन्होंने 2022 के एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल और 2016 की एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता. वहीं, उनकी दूसरी बेटी सुनैना सिंह ने खेल प्रशासन के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई है और वर्तमान में वे IOA की उपाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं.





