“भारत की घटती जनसंख्या दर पर एलन मस्क की चेतावनी: ‘रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे गिरा TFR, भविष्य के लिए बड़ा संकेत’”

टेस्ला CEO एलन मस्क ने भारत की घटती प्रजनन दर पर जताई चिंता, सोशल मीडिया पर रिपोर्ट शेयर कर उठाए सवाल
टेस्ला के सीईओ और अरबपति एलन मस्क ने भारत की गिरती प्रजनन दर (Fertility Rate) को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि भारत की जन्म दर अब “रिप्लेसमेंट लेवल” से नीचे पहुंच चुकी है, जो भविष्य के लिए एक बड़ी जनसांख्यिकीय चुनौती का संकेत है।
“शिक्षित वर्ग में पहले से तेज गिरावट” : मस्क का दावा
एलन मस्क ने कहा कि विशेष रूप से शिक्षित वर्ग में प्रजनन दर में गिरावट कई वर्षों पहले ही शुरू हो चुकी थी। उन्होंने एक रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए बताया कि पिछले एक दशक में भारत का कुल प्रजनन दर (TFR) 2.3 से घटकर लगभग 1.9 पर आ गया है, जो जनसंख्या संतुलन के लिए निर्धारित 2.1 के स्तर से कम है।
UNFPA रिपोर्ट के आंकड़े: भारत में TFR 1.9, क्षेत्रीय असंतुलन स्पष्ट
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की ‘स्टेट ऑफ वर्ल्ड पॉपुलेशन 2025’ रिपोर्ट के अनुसार भारत का कुल प्रजनन दर अब 1.9 प्रति महिला दर्ज किया गया है। रिपोर्ट बताती है कि देश में जनसंख्या स्थिरता के लिए आवश्यक 2.1 का स्तर अब पूरा नहीं हो रहा है। भारत ने 2023 में चीन को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बनने का दर्जा हासिल किया था, लेकिन अब घटती प्रजनन दर नई चुनौती के रूप में सामने है।
राज्यों में बड़ा अंतर: बिहार से दिल्ली तक भारी असमानता
रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रजनन दर में बड़ा क्षेत्रीय अंतर देखने को मिलता है। बिहार (3.0), मेघालय (2.9) और उत्तर प्रदेश (2.7) जैसे राज्यों में TFR अभी भी राष्ट्रीय औसत से अधिक है। वहीं दिल्ली (1.2) का प्रजनन दर फिनलैंड जैसे विकसित देशों से भी कम दर्ज किया गया है। दक्षिण भारत के तमिलनाडु और केरल में भी यह दर लगातार कम बनी हुई है।
क्यों घट रही है प्रजनन दर? विशेषज्ञों ने बताए कई कारण
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में TFR में गिरावट के पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण जिम्मेदार हैं। महिलाओं में शिक्षा का बढ़ता स्तर, शहरीकरण, महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत के कारण छोटे परिवार की प्रवृत्ति बढ़ी है। इसके अलावा देर से विवाह, करियर प्राथमिकता और गर्भनिरोधक साधनों की आसान उपलब्धता ने भी इस बदलाव को तेज किया है।
UNFPA की चेतावनी: सामाजिक चुनौतियां अब भी बरकरार
UNFPA रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रगति के बावजूद कई सामाजिक चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। कम उम्र में विवाह, मातृ मृत्यु दर और लिंगानुपात में असंतुलन जैसे मुद्दे भारत के लिए अब भी गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं।
बड़ा संकेत: जनसंख्या स्थिरता और भविष्य की नीति पर उठे सवाल
घटती प्रजनन दर को विशेषज्ञ भविष्य की जनसंख्या संरचना, श्रम शक्ति और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण संकेत मान रहे हैं। अब सवाल यह है कि क्या भारत इस बदलाव के अनुरूप अपनी सामाजिक और आर्थिक नीतियों को नए सिरे से ढाल पाएगा।







