Singhal Plant Expansion Protest : सिंघल इस्पात के नए प्लांट विस्तार का विरोध, ग्रामीणों ने जनसुनवाई पर उठाए सवाल

रायगढ़। पूर्वी अंचल के ग्राम सियारपाली, कोटरलिया और पतरा पाली में मेसर्स सिंघल इस्पात एंड पावर लिमिटेड के प्रस्तावित नए प्लांट स्थापना को लेकर आयोजित जनसुनवाई में ग्रामीणों और कांग्रेस पदाधिकारियों ने विरोध दर्ज कराया। विरोध कर रहे लोगों ने जनसुनवाई की प्रक्रिया, पर्यावरणीय प्रभाव और स्थानीय हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रशासन के समक्ष अपनी आपत्तियां रखीं।
ग्रामीणों ने जनसुनवाई की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट स्थापना से प्रभावित होने वाले कई गांवों के लोगों को जनसुनवाई की पर्याप्त सूचना नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि महापल्ली, जुरडा, विश्वनाथपाली, शकरबोगा और बेलेरिया जैसे आसपास के गांवों की भागीदारी सुनिश्चित नहीं की गई, जिससे जनसुनवाई की प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं।
विरोध कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने जल्दबाजी में प्रक्रिया पूरी की। हालांकि इस संबंध में प्रशासन और कंपनी पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।
भूमि अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर उठी मांग
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि कंपनी द्वारा वर्षों पहले किसानों से खरीदी गई जमीन पर अब उद्योग विस्तार की तैयारी की जा रही है। उन्होंने मांग की कि यदि भूमि का उपयोग लंबे समय तक नहीं किया गया तो किसानों को वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार उचित मुआवजा दिया जाए अथवा भूमि वापसी की प्रक्रिया पर विचार किया जाए।
मौजूदा प्लांट से प्रदूषण का हवाला देकर जताई चिंता
ग्रामीणों ने तराईमाल स्थित सिंघल इस्पात के मौजूदा प्लांट से होने वाले कथित प्रदूषण का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि फ्लाई ऐश, धूल और औद्योगिक गतिविधियों से क्षेत्र के पर्यावरण पर प्रभाव पड़ा है।
ग्रामीणों ने आशंका जताई कि नए प्लांट के विस्तार से सियारपाली, पतरा पाली, तारपाली, गोपालपुर और झारगुड़ा सहित आसपास के क्षेत्रों में पर्यावरणीय दबाव बढ़ सकता है।
रोजगार और सीएसआर को लेकर भी नाराजगी
ग्राम पंचायत देलारी के सरपंच वीरेंद्र चौहान और ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ग्रामीण अध्यक्ष रवि यादव ने कंपनी की रोजगार नीति और सीएसआर गतिविधियों पर सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय युवाओं को अपेक्षित रोजगार अवसर नहीं मिल रहे हैं और सीएसआर राशि का लाभ प्रभावित क्षेत्रों तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच रहा है। उन्होंने स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने की मांग रखी।
बड़े आंदोलन की चेतावनी
विरोध कर रहे ग्रामीणों ने कहा कि जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रशासन से जनसुनवाई प्रक्रिया की समीक्षा करने और स्थानीय लोगों की आपत्तियों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।







