26 साल बाद भी ‘अधूरी न्यायधानी’: हक की लड़ाई में सड़क पर उतरे वकील, बिलासपुर में सभी केंद्रीय ट्रिब्यूनल स्थापित करने की मांग

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी बिलासपुर को ‘पूर्ण न्यायधानी’ का दर्जा दिलाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। बिलासपुर के अधिवक्ताओं ने केंद्रीय न्यायिक एवं अर्ध-न्यायिक संस्थानों की स्थापना शहर में किए जाने की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष चंद्रशेखर बाजपेयी के नेतृत्व में 60 से अधिक अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू को ज्ञापन सौंपा।
दूसरे राज्यों के चक्कर लगाने की मजबूरी
अधिवक्ताओं का कहना है कि छत्तीसगढ़ में रेलवे, कोयला, ऊर्जा, डाक, शिक्षा और अन्य केंद्रीय संस्थानों से जुड़े बड़ी संख्या में कर्मचारी और नागरिक रहते हैं। इसके बावजूद कई महत्वपूर्ण केंद्रीय अधिकरणों के मामलों के लिए उन्हें मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के शहरों की यात्रा करनी पड़ती है। इससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त लागत आती है।
रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल बिलासपुर में लाने की मांग
अधिवक्ताओं ने रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल (RCT) को बिलासपुर में स्थापित करने की मांग उठाई। उनका तर्क है कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) का मुख्यालय बिलासपुर में है और रेलवे से जुड़े दावों के मामलों में छत्तीसगढ़ के लोगों को वर्तमान व्यवस्था के तहत अन्य शहरों की ओर जाना पड़ता है।
CAT की स्थायी बेंच की मांग
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) की स्थायी बेंच बिलासपुर में स्थापित करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। अधिवक्ताओं के अनुसार रेलवे, SECL, NTPC, केंद्रीय विश्वविद्यालय, डाक विभाग सहित विभिन्न केंद्रीय संस्थानों के हजारों कर्मचारियों के सेवा संबंधी मामले CAT के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। उनका कहना है कि बिलासपुर में फिलहाल सर्किट बेंच की सीमित अवधि की सुनवाई होती है, इसलिए स्थायी बेंच की आवश्यकता है।
DRT और DRAT को लेकर भी मांग
बैंकिंग और वित्तीय विवादों से जुड़े मामलों के लिए ऋण वसूली अधिकरण (DRT) की सुविधा बिलासपुर में उपलब्ध कराने की मांग की गई है। अधिवक्ताओं का कहना है कि इससे छत्तीसगढ़ के पक्षकारों को दूसरे राज्यों में जाने की परेशानी कम होगी। साथ ही संबंधित अपीलीय व्यवस्था को लेकर भी उचित संस्थागत सुविधा विकसित करने की मांग रखी गई।
CGIT की स्थापना की भी मांग
औद्योगिक और श्रमिक विवादों के त्वरित निपटारे के लिए सेंट्रल गवर्नमेंट इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल (CGIT) की स्थापना बिलासपुर में करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। अधिवक्ताओं का कहना है कि औद्योगिक गतिविधियों और केंद्रीय उपक्रमों की मौजूदगी को देखते हुए बिलासपुर में ऐसी संस्थाओं की स्थापना न्यायिक पहुंच को मजबूत करेगी।
‘सिर्फ नाम की नहीं, काम की न्यायधानी बने बिलासपुर’
अधिवक्ताओं ने कहा कि राज्य गठन के समय बिलासपुर को न्यायधानी के रूप में विकसित करने की भावना थी। वर्तमान में उच्च न्यायालय बिलासपुर में स्थापित है, ऐसे में केंद्रीय न्यायिक एवं अर्ध-न्यायिक संस्थानों की मौजूदगी भी यहां बढ़ाई जानी चाहिए। उनका कहना है कि प्रमुख केंद्रीय अधिकरणों की स्थापना के बिना न्यायधानी की अवधारणा अधूरी बनी रहेगी।
बड़े आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन सौंपने के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्रशेखर बाजपेयी के साथ एम.के. पाठक, सुनील मिश्रा, गोविंद तिवारी, सज्जन तिवारी, यथार्थ सिंह, अच्युत अंचल तिवारी, विशाल सिंह, ऋषभ पांडेय, रजनीश तिवारी, सत्यम सिंह, रूपेन्द्र सिंह, अनिल शुक्ला, दीपेश कुमार, अविनाश पांडेय, डॉ. उषा किरण बाजपेयी, शिल्पा जोशी, कविता आर्या, मीनाक्षी राठौर, रौशनी सोनी, समृद्धि मिश्रा, दीप्ति शुक्ला, राहुल गोस्वामी, अभिषेक कुमार पाण्डेय सहित 60 से अधिक अधिवक्ता मौजूद रहे।
अधिवक्ताओं ने कहा कि यदि केंद्र सरकार की ओर से इस मांग पर जल्द ठोस पहल नहीं की गई, तो आंदोलन को व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा।






