हाईकोर्ट ने जारी की सांसद-विधायकों के लंबित आपराधिक मामलों की स्टेटस रिपोर्ट, बिलासपुर समेत कई जिलों के प्रकरण शामिल

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश के सांसदों और विधायकों से जुड़े लंबित आपराधिक मामलों की अपडेटेड स्टेटस रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में जुलाई 2026 तक प्रदेश के विभिन्न जिलों की निचली अदालतों में लंबित प्रकरणों की स्थिति, सुनवाई की तारीख और अब तक हुई न्यायालयीन कार्रवाई का विवरण शामिल किया गया है। रिपोर्ट में बिलासपुर, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, कबीरधाम, रायपुर और राजनांदगांव सहित कई जिलों के मामलों का उल्लेख किया गया है।
बिलासपुर में कोटा विधायक के खिलाफ मामला
रिपोर्ट के अनुसार बिलासपुर में कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव के खिलाफ अपराध क्रमांक 541/2026 दर्ज है। यह प्रकरण भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 190, 191(2), 192 और 126(2) के तहत दर्ज किया गया है। मामला सीजेएम बिलासपुर की अदालत में विचाराधीन है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस प्रकरण में न्यायालयीन प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और मामले से संबंधित कार्रवाई अदालत के स्तर पर जारी है।
बलौदाबाजार में भी कई मामले लंबित
हाईकोर्ट की स्टेटस रिपोर्ट में बलौदाबाजार जिले से जुड़े कई राजनीतिक नेताओं के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों का भी उल्लेख किया गया है। बलौदाबाजार की तृतीय एडीजे और सीजेएम अदालतों में तत्कालीन विधायक किशोर नवरंग, विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व विधायक प्रमोद शर्मा सहित अन्य के खिलाफ दर्ज मामलों की न्यायालयीन स्थिति रिपोर्ट में दर्ज है।
इन मामलों में संबंधित अदालतों में सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया अलग-अलग स्तर पर जारी है।
छह जिलों के मामलों की दी गई जानकारी
हाईकोर्ट द्वारा जारी रिपोर्ट में केवल बिलासपुर और बलौदाबाजार ही नहीं, बल्कि जांजगीर-चांपा, कबीरधाम, रायपुर और राजनांदगांव की निचली अदालतों में सांसदों और विधायकों से जुड़े लंबित आपराधिक प्रकरणों की भी जानकारी शामिल की गई है।
रिपोर्ट में प्रत्येक मामले के संबंध में अपराध क्रमांक, संबंधित धाराएं, किस न्यायालय में मामला लंबित है और प्रकरण की वर्तमान स्थिति जैसी जानकारियां दर्ज की गई हैं। इसका उद्देश्य ऐसे मामलों की न्यायालयीन प्रगति की निगरानी और अद्यतन स्थिति उपलब्ध कराना है।
लंबित मामलों की न्यायालयीन निगरानी पर जोर
सांसदों और विधायकों से जुड़े आपराधिक मामलों में तेजी से सुनवाई और उनकी प्रगति की निगरानी को लेकर न्यायपालिका की ओर से समय-समय पर जानकारी अपडेट की जाती रही है। इसी क्रम में हाईकोर्ट की यह स्टेटस रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित होना अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। अंतिम निर्णय संबंधित न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा।






