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NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, छात्रों के खिलाफ FIR रद्द

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नई दिल्ली। NEET पेपर लीक के विरोध में दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों में हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा आदेश दिया। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को समाप्त करने का आदेश दिया है। अदालत ने इस मामले में संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्राप्त विशेष शक्तियों का इस्तेमाल किया।

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से उन छात्रों को बड़ी राहत मिली है, जिनके खिलाफ जुलाई में NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान मामले दर्ज किए गए थे।

गंभीर आपराधिक मामलों में राहत नहीं

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि गंभीर और जघन्य अपराधों में पहले से आपराधिक पृष्ठभूमि रखने वाले आरोपियों को इस राहत का लाभ नहीं मिलेगा। सरकार की ओर से पहले ही अदालत को बताया गया था कि ऐसे मामलों को वापस नहीं लिया जाएगा।

अदालत के समक्ष केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों की ओर से एफआईआर वापस लेने को लेकर सहमति जताई गई थी। इसके बाद शीर्ष अदालत ने प्रदर्शन से संबंधित मामलों को समाप्त करने का आदेश दिया।

नई एफआईआर दर्ज करने पर भी रोक

रिपोर्टों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जिन मामलों को अदालत के समक्ष नहीं लाया गया है, लेकिन वे उन्हीं प्रदर्शनों से संबंधित हैं, उन्हें आगे नहीं बढ़ाया जाए और बंद माना जाए। हालांकि गंभीर आपराधिक गतिविधियों से जुड़े मामलों को इस राहत से अलग रखा गया है।

20 से 25 जुलाई के प्रदर्शनों से जुड़े थे मामले

NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर जुलाई में देश के कई हिस्सों में छात्र प्रदर्शन हुए थे। दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की घटनाएं भी सामने आई थीं। इन घटनाओं के बाद कई छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

केंद्र सरकार ने बाद में सुप्रीम कोर्ट से अनुच्छेद 142 के तहत इन मामलों को समाप्त करने की मांग की थी। दिल्ली पुलिस ने भी प्रदर्शन से संबंधित 13 एफआईआर वापस लेने के लिए शीर्ष अदालत का रुख किया था।

छात्रों को मिली बड़ी राहत

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले बड़ी संख्या में छात्रों को कानूनी राहत मिली है। अदालत का यह फैसला शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, गंभीर आपराधिक आरोपों और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों के मामलों को अलग रखे जाने से यह भी स्पष्ट है कि राहत सभी आरोपियों के लिए समान रूप से लागू नहीं होगी।

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