नक्सल प्रभावित सुकमा में सामने आई कुदरत की खूबसूरती, बेंगपाल झरना बना आकर्षण का केंद्र

लंबे समय से दुर्गम रहे इलाके में पहुंचे चार आला अधिकारी, प्राकृतिक सौंदर्य का लिया जायजा
सुकमा। छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला अब धीरे-धीरे अपनी पुरानी पहचान से आगे बढ़कर प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन की संभावनाओं के लिए भी चर्चा में आने लगा है। नक्सल गतिविधियों में कमी के साथ जिले के ऐसे वन क्षेत्र भी सामने आ रहे हैं, जो लंबे समय तक आम लोगों की पहुंच से दूर रहे।
बेंगपाल झरने ने खींचा ध्यान
इसी क्रम में सुकमा के नक्सल प्रभावित इलाके में स्थित बेंगपाल झरना इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। घने जंगलों और प्राकृतिक परिवेश के बीच मौजूद यह झरना क्षेत्र की छिपी हुई प्राकृतिक संपदा की तस्वीर पेश करता है।
चार आला अधिकारी पहुंचे मौके पर
बेंगपाल झरने की प्राकृतिक सुंदरता और क्षेत्र की संभावनाओं का जायजा लेने जिले के चार वरिष्ठ अधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण किया और आसपास के प्राकृतिक वातावरण को करीब से देखा।
पर्यटन के लिहाज से बढ़ सकती हैं संभावनाएं
सुकमा भौगोलिक रूप से घने जंगलों और वनांचलों वाला जिला है। जिले के कई हिस्से लंबे समय तक सुरक्षा चुनौतियों के कारण आम आवाजाही से दूर रहे हैं। अब परिस्थितियों में बदलाव के साथ इन क्षेत्रों की प्राकृतिक खूबसूरती सामने आने लगी है।
बेंगपाल जैसे झरने और वन क्षेत्र आने वाले समय में स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी नए अवसर पैदा कर सकते हैं। हालांकि, ऐसे पर्यटन स्थलों के विकास में पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण होगा।
बदल रही है सुकमा की तस्वीर
सुकमा में प्राकृतिक स्थलों का सामने आना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि बस्तर के दूरस्थ इलाकों में पर्यटन की नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं में सुधार के साथ आने वाले समय में ऐसे कई अनदेखे प्राकृतिक स्थल लोगों के सामने आ सकते हैं।






