बस्तर संभाग के तीन जिलों में बाघ की दस्तक, निगरानी के लिए बनेगा टाइगर मूवमेंट सेल

दंतेवाड़ा, बस्तर और कोंडागांव में लगातार सामने आ रहे बाघ के मूवमेंट के मामले, एक ही बाघ या अलग-अलग होने की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं
जगदलपुर। बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा, बस्तर और कोंडागांव जिले में पिछले करीब एक साल से अलग-अलग स्थानों पर बाघ देखे जाने की घटनाएं सामने आ रही हैं। लगातार मिल रही सूचनाओं के बाद वन विभाग ने बाघ की गतिविधियों पर निगरानी और मॉनिटरिंग व्यवस्था को मजबूत करने का निर्णय लिया है।
तीन जिलों में लगातार सामने आ रही मौजूदगी
बस्तर संभाग भौगोलिक रूप से घने जंगलों, पहाड़ी क्षेत्रों और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास के लिए जाना जाता है। दंतेवाड़ा, बस्तर और कोंडागांव के विस्तृत वन क्षेत्रों में पिछले एक साल के दौरान बाघ के दिखाई देने अथवा उसके मूवमेंट से जुड़ी घटनाएं सामने आती रही हैं।
हालांकि, वन विभाग अभी इस स्थिति की पुष्टि नहीं कर पाया है कि अलग-अलग जिलों में दिखाई देने वाला बाघ एक ही बाघ है या अलग-अलग बाघ। इसके लिए उसके मूवमेंट और गतिविधियों की लगातार निगरानी की जा रही है।
हर वन मंडल में बनेगा टाइगर मूवमेंट सेल
बाघ की लगातार गतिविधियों को देखते हुए संबंधित वन मंडलों में टाइगर मूवमेंट सेल गठित करने का फैसला लिया गया है। यह सेल बाघ की मौजूदगी से संबंधित सूचनाओं को एकत्र करने, उसके आवागमन पर नजर रखने और अलग-अलग क्षेत्रों से मिलने वाली जानकारी का आपसी मिलान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मूवमेंट की निगरानी से स्थिति होगी स्पष्ट
वन विभाग की निगरानी व्यवस्था के जरिए बाघ के आवागमन वाले क्षेत्रों की जानकारी जुटाई जाएगी। इससे यह पता लगाने में भी मदद मिलेगी कि अलग-अलग जिलों में सामने आ रही घटनाएं किसी एक बाघ के क्षेत्र विस्तार से जुड़ी हैं या वहां अलग-अलग बाघों की मौजूदगी है।
वन विभाग की ओर से बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने के साथ संबंधित क्षेत्रों में लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत बताई जा रही है।






