चक्रधर समारोह में मेघा बोस ताम्रकार की लोकगायकी ने मोहा मन, छत्तीसगढ़ी संगीत की विविध विधाओं से सजी शाम

सुमधुर आवाज और पारंपरिक लोकधुनों पर दर्शकों ने बजाई तालियां
रायगढ़। रामलीला मैदान में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह के दूसरे दिन रायपुर की प्रसिद्ध लोक गायिका मेघा बोस ताम्रकार ने छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत की विविध विधाओं की प्रस्तुति देकर दर्शकों को भावविभोर कर दिया। उनकी गायकी में छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा, मिट्टी की खुशबू और पारंपरिक धुनों की मिठास साफ नजर आई।
छह वर्ष की उम्र से संगीत साधना
मेघा बोस ताम्रकार ने गुरु चंदना सेन और कृष्ण कुमार पाटिल के मार्गदर्शन में संगीत की शिक्षा एवं साधना की है। बताया गया कि उन्होंने महज छह वर्ष की उम्र से ही संगीत के क्षेत्र में अपनी यात्रा शुरू कर दी थी। संगीत के साथ-साथ वे कथक नृत्य में भी विशारद हैं।
कई प्रतिष्ठित मंचों पर दे चुकी हैं प्रस्तुति
मेघा बोस ताम्रकार राज्योत्सव, राजभवन, विभिन्न फिल्म फेस्टिवल और पावस प्रसंग जैसे प्रतिष्ठित आयोजनों में अपनी कला का प्रदर्शन कर चुकी हैं। चक्रधर समारोह में भी उन्होंने अपनी विशिष्ट गायन शैली के माध्यम से छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत की अलग-अलग विधाओं को मंच पर जीवंत किया।
लोकधुनों पर झूमे दर्शक
उनकी प्रस्तुति में पारंपरिक लोकधुनों और छत्तीसगढ़ी संगीत की विविध रंगत देखने को मिली। सुमधुर गायन और प्रभावी मंच प्रस्तुति ने समारोह में मौजूद दर्शकों को बांधे रखा। प्रस्तुति समाप्त होने पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकार का उत्साहवर्धन किया।






