स्मृति ईरानी के छत्तीसगढ़ दौरे में सरकार-संगठन के कामकाज की होगी समीक्षा, हारी हुई 36 सीटों पर बीजेपी का फोकस

25 और 26 अक्टूबर को मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और संगठन के पदाधिकारियों से करेंगी चर्चा; विभागीय उपलब्धियों, योजनाओं की प्रगति और जिलों में सक्रियता का लिया जाएगा फीडबैक
रायपुर। भाजपा की नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी अपने पहले छत्तीसगढ़ दौरे में ही सरकार और संगठन के कामकाज की समीक्षा करेंगी। उनके साथ प्रदेश सह-प्रभारी सिद्धार्थ शंभू भी छत्तीसगढ़ पहुंचेंगे। 25 और 26 अक्टूबर को होने वाली बैठकों में मंत्रियों के विभागीय प्रदर्शन के साथ संगठन की जमीनी स्थिति और कार्यकर्ताओं से मिलने वाले फीडबैक पर भी चर्चा होगी। पार्टी का विशेष फोकस वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में हारी हुई 36 सीटों पर रहेगा।
इन सीटों पर संगठन की स्थिति, बूथ समितियों की सक्रियता और पन्ना प्रमुखों की भूमिका की समीक्षा की जाएगी। इसके जरिए उन कारणों को समझने की कोशिश होगी, जिनकी वजह से पार्टी को इन क्षेत्रों में हार का सामना करना पड़ा था। साथ ही आगामी चुनावों से पहले संगठन को मजबूत करने और कमजोरियों को दूर करने के लिए जरूरी कदमों पर भी चर्चा हो सकती है।
मंत्रियों से अलग-अलग चर्चा, संगठन से भी लेंगी फीडबैक
स्मृति ईरानी सांसदों, विधायकों और मंत्रियों के साथ अलग-अलग बैठकें करेंगी। इसके अलावा प्रदेश संगठन के पदाधिकारियों और जिला स्तर के नेताओं से भी चर्चा होगी। इन बैठकों में सरकार की योजनाओं और संगठन की जमीनी स्थिति के बीच तालमेल का आकलन महत्वपूर्ण रहेगा।
मंत्रियों से उनके विभागों की उपलब्धियों और योजनाओं की प्रगति का ब्योरा लिया जा सकता है। वहीं, संगठन के पदाधिकारियों से जिलों में सरकार के कामकाज, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और जनता से जुड़े मुद्दों पर फीडबैक मिलने की संभावना है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि सरकारी योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक कितना पहुंच रहा है और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है।
मोदी की गारंटी और योजनाओं के क्रियान्वयन पर रहेगा जोर
विभागीय समीक्षा में योजनाओं की घोषणाओं और उनके वास्तविक क्रियान्वयन के बीच की स्थिति महत्वपूर्ण हो सकती है। मंत्रियों से यह जानकारी ली जा सकती है कि उनके विभागों ने अब तक कौन-कौन से लक्ष्य पूरे किए हैं, कितने काम लंबित हैं और किन परियोजनाओं में देरी हो रही है।
मोदी की गारंटी के तहत किए गए कार्यों की प्रगति, स्वीकृत और पूर्ण परियोजनाओं, बजट के उपयोग तथा लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचने की स्थिति भी समीक्षा का हिस्सा बन सकती है। जिन योजनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है, वहां देरी के कारणों और काम पूरा करने की समयसीमा पर चर्चा हो सकती है।
इसके अलावा विभागों से जुड़े विवाद, लंबित मामले, जनता की शिकायतें और प्रशासनिक स्तर पर आ रही अड़चनें भी समीक्षा में अहम रहेंगी। इससे सरकार की उपलब्धियों के साथ उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिल सकती है, जहां कामकाज में सुधार की जरूरत है।
प्रभार वाले जिलों में मंत्रियों की सक्रियता भी कसौटी
छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्रियों को जिलों की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। ऐसे में उनके कामकाज का आकलन केवल विभागीय उपलब्धियों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि प्रभार वाले जिलों में उनकी सक्रियता भी महत्वपूर्ण होगी।
बैठकों में मंत्रियों से उनके जिलों के दौरों, जिला संगठन के साथ बैठकों और कार्यकर्ताओं की समस्याओं के निराकरण को लेकर जानकारी ली जा सकती है। जिलाध्यक्षों, जिला प्रभारियों, विधायकों और सांसदों से मिलने वाला फीडबैक भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
समीक्षा के दौरान यह देखा जा सकता है कि मंत्री नियमित रूप से अपने प्रभार वाले जिलों का दौरा कर रहे हैं या नहीं, मासिक बैठकें आयोजित हो रही हैं या नहीं और जनता की समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। कार्यकर्ताओं की शिकायतों पर कार्रवाई, प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने की पहल और जिला संगठन के साथ समन्वय भी चर्चा के प्रमुख विषय हो सकते हैं।
चुनावी तैयारियों के लिहाज से अहम माना जा रहा दौरा
स्मृति ईरानी का यह दौरा सरकार के कामकाज और संगठन की मजबूती का आकलन करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खास तौर पर 2023 के विधानसभा चुनाव में हारी हुई 36 सीटों पर संगठन की स्थिति की समीक्षा के जरिए पार्टी अपनी कमजोरियों को समझने और उन्हें दूर करने की रणनीति पर काम कर सकती है।
विभागीय प्रदर्शन, योजनाओं के क्रियान्वयन, जिलों में मंत्रियों की सक्रियता और बूथ स्तर पर संगठन की मजबूती से जुड़े मुद्दे इन बैठकों के केंद्र में रह सकते हैं। समीक्षा के बाद सामने आने वाले फीडबैक के आधार पर सरकार और संगठन के बीच समन्वय बेहतर करने तथा आगामी चुनावी तैयारियों को गति देने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।






