16,040 फीट की ऊंचाई पर छत्तीसगढ़ के मल्लखंब खिलाड़ियों का हैरतअंगेज प्रदर्शन, ओपी चौधरी ने बताया गौरव का क्षण

बारालाचा दर्रे में माइनस तापमान और कम ऑक्सीजन के बीच पोल मल्लखंब पर दिखाए करतब; वित्त मंत्री बोले—संकल्प हो तो कोई भी ऊंचाई बड़ी नहीं
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मल्लखंब खिलाड़ियों ने लेह-लाहौल के बारालाचा दर्रे में करीब 16,040 फीट की ऊंचाई पर साहसिक प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। माइनस तापमान और कम ऑक्सीजन वाले चुनौतीपूर्ण वातावरण में खिलाड़ियों ने पोल मल्लखंब पर हैरतअंगेज करतब दिखाकर अपनी शारीरिक क्षमता, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए खिलाड़ियों को बधाई दी और इसे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का क्षण बताया।
कठिन परिस्थितियों में दिखाया साहस और कौशल
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने अपने संदेश में कहा कि बारालाचा दर्रे जैसी ऊंचाई पर सांस लेना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऑक्सीजन की कमी के कारण सिरदर्द, चक्कर और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसी परिस्थितियों के बीच छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने मल्लखंब पर शानदार प्रदर्शन कर अपनी क्षमता और साहस का परिचय दिया है।
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल शारीरिक शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि अटूट इच्छाशक्ति, अनुशासन, साहस और समर्पण का प्रतीक है। खिलाड़ियों ने साबित किया है कि मजबूत संकल्प और निरंतर अभ्यास से कठिन चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।
प्राचीन भारतीय खेल परंपरा को मिली नई पहचान
मल्लखंब भारत की प्राचीन पारंपरिक खेल विधाओं में शामिल है। इसमें खिलाड़ी लकड़ी के खंभे पर संतुलन, शक्ति, लचीलेपन और शारीरिक नियंत्रण का प्रदर्शन करते हैं। अत्यधिक ऊंचाई और प्रतिकूल मौसम में इस खेल का प्रदर्शन इसकी कठिनाई को और बढ़ा देता है।
ओपी चौधरी ने कहा कि इस तरह के प्रदर्शन से भारतीय पारंपरिक खेलों की क्षमता और विशिष्टता को व्यापक पहचान मिलती है। छत्तीसगढ़ के युवा हॉकी और तीरंदाजी जैसे खेलों के साथ-साथ मल्लखंब सहित पारंपरिक एवं साहसिक खेलों में भी अपनी प्रतिभा प्रदर्शित कर रहे हैं।
खिलाड़ियों को प्रोत्साहित कर रही राज्य सरकार
वित्त मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार पारंपरिक खेलों और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। मल्लखंब को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य में प्रशिक्षण सुविधाओं और अकादमी जैसी व्यवस्थाओं को विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।






