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खरसिया आरओबी को मिली मंजूरी, पुराने डीपीआर पर बनेगा पुल – ठेकेदार को लेकर अब भी संशय

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रायगढ़। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार खरसिया में रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) निर्माण को मंजूरी मिल गई है। वित्त विभाग ने पुराने डीपीआर को ही स्वीकृति दी है। वर्ष 2023 में इसका टेंडर हुआ था, जिसमें जयपुर की भारत स्पान कंपनी को ठेका मिला था। अब सवाल यह है कि दो साल पुराने इस्टीमेट पर क्या वही कंपनी काम करेगी या दोबारा टेंडर जारी होगा। सूत्रों के अनुसार, पूर्व में चयनित ठेकेदार से ही एग्रीमेंट करने की तैयारी है।

खरसिया आरओबी की कहानी कई उतार-चढ़ावों से भरी रही है। 2021 में इसकी घोषणा हुई थी और मार्च 2021 में प्रस्ताव इंजीनियर-इन-चीफ को भेजा गया। राज्य और केंद्र सरकार की बराबर हिस्सेदारी से बनने वाले इस ब्रिज के लिए 14 सितंबर 2022 को भूमिपूजन किया गया और 64.95 करोड़ की स्वीकृति मिली। पहली बार मई 2023 में टेंडर खुला तो मुंगेली की कंपनी को ठेका मिला लेकिन उसने एग्रीमेंट नहीं किया। दूसरी बार सिंगल टेंडर होने से प्रक्रिया निरस्त हो गई। तीसरी बार जयपुर की भारत स्पान कंपनी ने करीब 59 करोड़ में प्रोजेक्ट हासिल किया, लेकिन तब एग्रीमेंट को मंजूरी नहीं मिल सकी।

अब 2025 में स्थिति बदली है। शुक्रवार को पीडब्ल्यूडी अवर सचिव ने पुराने डीपीआर को मंजूरी देते हुए आदेश जारी किया है। हालांकि, बड़ी चुनौती यह है कि 2023 की तुलना में अब रॉ मटेरियल, एसओआर रेट और मजदूरी की लागत काफी बढ़ चुकी है। ऐसे में ठेकेदार पुराने अनुमान पर एग्रीमेंट करने को तैयार होगा या नहीं, इस पर संशय है।

आरओबी का निर्माण ‘वाय शेप’ में होना है। इसका एक सिरा हमालपारा बस स्टैंड, दूसरा रेलवे काउंटर और तीसरा छोर सब्जी मंडी के पास उतरेगा।

लागत बढ़ने से बदला लोकेशन का विचार

बीते महीनों में खरसिया आरओबी के लिए नया लोकेशन तलाशने की कोशिश हुई थी। सेतु विभाग, रेलवे और राजस्व विभाग की बैठक के बाद पाया गया कि नई साइट पर आरओबी बनाने में लागत 100 करोड़ से ज्यादा होगी। जबकि पुरानी साइट पर भूमि अर्जन पहले ही हो चुका है। ऐसे में नए प्रस्ताव को छोड़कर पुराने स्थान पर ही काम करने का निर्णय लिया गया।

गौरतलब है कि 27 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल रूप से खरसिया आरओबी का शिलान्यास किया था, जबकि उस समय तक राज्य सरकार ने एग्रीमेंट तक नहीं किया था। सवाल यह उठ रहा है कि जब पुराने प्रस्ताव को ही मंजूरी देनी थी, तो इसमें दो साल की देरी क्यों की गई? यदि समय पर एग्रीमेंट होता तो अब तक आरओबी का निर्माण कार्य पूरा हो चुका होता।

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