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सोमवती अमावस्या 2026: 15 जून को बनेगा शुभ संयोग, जानें पूजा, व्रत और धार्मिक महत्व

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नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन तिथि 15 जून, सोमवार को मनाई जाएगी।

भगवान शिव और चंद्रदेव की उपासना का विशेष दिन

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव और चंद्रदेव की पूजा, व्रत और दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस दिन की गई साधना को अत्यंत फलदायी माना गया है।

स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और योग

द्रिक पंचांग के अनुसार, सोमवती अमावस्या पर स्नान और दान का शुभ समय प्रातः 4:03 बजे से 4:43 बजे तक रहेगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का भी संयोग बन रहा है, जो 5:23 बजे सुबह से 7:08 बजे शाम तक प्रभावी रहेगा।

शिव पूजा और बिल्व पत्र का महत्व

इस दिन भगवान शिव की पूजा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है। मान्यता है कि बिल्व पत्र से शिवलिंग का अभिषेक करने और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बिल्व पत्र का उपयोग अत्यंत शुभ माना गया है।

तुलसी पूजा और दांपत्य जीवन के उपाय

सोमवती अमावस्या की शाम तुलसी पूजा का विशेष महत्व है। तुलसी के पौधे के नीचे दीपक जलाकर पूजा करने और मंत्र जाप करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। वहीं पीपल वृक्ष की पूजा और परिक्रमा को दांपत्य जीवन में मधुरता बढ़ाने वाला माना गया है।

पितृ तर्पण और दान का महत्व

इस दिन पितरों के लिए तर्पण करने की परंपरा भी महत्वपूर्ण है। खीर का दान और “पितृभ्यो नमः” मंत्र का जाप करने से पितृ दोष शांत होने और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है।

धार्मिक मान्यता: इस दिन मौन व्रत, दान-पुण्य और मंत्र जाप को अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना गया है।

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