रायगढ़

रसूख के आगे स्वास्थ्य विभाग बौना…।।नर्सिंग होम एक्ट तथा महामारी अधिनियम की धज्जियां उड़ाने वाले पर विभाग मेहरबान क्यों ??

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स्वास्थ्य विभाग का तो पता नही पर सिटी कोतवाली पुलिस ने आनंद फार्मेंसी के खिलाफ जांच खोली..।

गैर-इरादतन हत्या,महामारी अधिनियम और नर्सिंग होम एक्ट का उलंघ्न के सम्बंध में मिली शिकायत के आधार पर पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग को लिखा पत्र।

सिंहघोष/रायगढ़:- शहर के हृदय स्थल स्टेशन चौक पर इंसानों के इलाज के नाम पर चल रहा विवादित आयुर्वेदिक दवा- खाना आनंद फार्मेंसी अंततः करीब 10 दिन तक सील रहने के बाद खोल दिया गया है। इसे लेकर शहर के अधिकांश लोगों में यह चर्चा बनी रही कि आनंद फार्मेंसी को जिन कारणों से प्रशासन ने बीते दिनों सील किया था उसकी जांच पूरी हुए बगैर उसे खोलने की अनुमति कैसे मिल गई। जबकि आनंद फार्मेंसी के संचालक डाक्टर गोपाल शर्मा के विरुद्ध खुद कोविड संक्रमित होने के दौरान मरीजों का इलाज किये जाने के अलावा कोविड पीड़ित महिला की बिना के जांच इलाज करने से हुई मौत जैसा गम्भीर मामला जांच की प्रक्रिया में है। ऐसे में सील किए गए दवा खाने को खोला जाना स्वभाविक तरीके से चर्चा का कारण बना हुआ है।

जबकि बीते दिनों कलेक्टर साहब के विशेष आदेश पर दीपावली पूजन के लिए महज दो घण्टे के लिए दवाखाने को खोलने को लेकर स्वास्थ्य विभाग के डाक्टर के.डी.पासवान का कहना था कि दिवाली के पूजन को लेकर कलेक्टर सर की अनुमति से महज दो घंटे के लिए खुलने वाले आनंद फार्मेसी को अभी पुनः सील नहीं किया गया हैं।

डाक्टर पासवान ने यह भी बताया था कि जब हम आनंद फार्मेसी की सील खोलने गए थे उसके पूर्व ही विभाग को बिना सूचना दिए यहाँ के संचालको ने दवाखाने को पहले ही खोल लिया था,उन्होंने हमें तीन घंटे समय मिलने की बात कही थी तब से अब तक इनकी कोई भी सूचना हमें नहीं है।

इधर दीपावली से चालू हुआ यह दवाखाना आठ दिन बाद भी लगातार चल रहा है। इस सम्बंध में स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन का अलग-अलग बयान सामने आ रहा है।

जबकि बीते दिनों समाजिक संस्था क्राइम फोर्स इंडिया के सदःयों ने लिखित आवेदन देकर आनंद फार्मेंसी संचालक की वर्तमान अवैधानिक गतिविधियों के अलावा पुराने तमाम कारनामों को ध्यान में रखते हुए वर्तमान की दो अक्षम्य अपराध के लिए जिंसमे खुद कोरोना पाजेटिव होकर कर कई दिनों तक मरीजो का इलाज करना और कोविड मरीज की बिना जांच इलाज करने के दौरान उसकी मौत के लिए दोषी मानते हुए संचालक गोपाल आनंद शर्मा के विरुद्ध महामारी अधिनियम,नर्सिंग होम एक्ट 1973 के अलावा गैर-इरादतन हत्या का अपराध दर्ज करने की मांग की है। उक्त आवेदन पर सिटी कोतवाली पुलिस ने जांच खोलते हुए शिकायत कर्ताओं का बयान दर्ज करना शुरू कर दिया है। खबर है कि पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग को एक पत्र लिखकर जांच में सहयोग की बात कही है। वही आनंद फार्मेंसी के सील बन्दी के बाद पुनः खोले जाने को लेकर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का बयान में भिन्नता कई प्रश्नों को जन्म देता है ??

इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन ??

यहां आनंद फार्मेंसी से जुड़ी दो वर्ष पुरानी एक घटना भी अवलोकनीय है जब इस दवाखाना संचालक के इजेक्शन लगाने से एक भला चंगा युवक काल के गाल में समा गया था। गौरतलब हो कि वर्ष 2018 में
साइकल से गिरकर घायल होने वाले 27 साल के मरीज की इंजेक्शन लगाने के 5 घंटे बाद मौत हो गई थी। मरीज का इलाज स्टेशन रोड स्थित इसी आनंद फार्मेसी में कराया गया था,जहां डॉ.शर्मा ने युवक को एक के बाद एक 3 इंजेक्शन लगाए थे । इससे मरीज का शरीर काला पड़ गया था,और उसकी कुछ ही देरी में मौत हो गई थी। यद्यपि घटना के बाद पुलिस ने शव का मेकाहारा में पोस्टमार्टम कराया था,परन्तु उक्त हौलनाक मामले में आश्चर्यजनक ढंग से जांच की जांच से डाक्टर शर्मा बच गए।। इधर दो बार
कोविड संक्रमित पाए गए इस दवाखाना स्थल और संचालक की डिग्री की जांच पूर्ण किए बिना ही दोबारा उसे संचालित करने की अनुमति दिये जाने जैसी लापरवाही का खामियाजा गरीब व लाचार मरीजों को भुगतना पड़ेगा। जिसमें गर्भवती माताओ से लेकर मासूम बच्चे व बुजुर्ग भी शामिल हैं। जो प्रतिदिन कम खर्चे में स्वास्थ्य लाभ की कामना लेकर इस आयुर्वेदिक कम मल्टीरोल दवाखाने आते हैं। उन्हें यहां बिना योग्यता व स्वास्थ्य विभाग से विधिवत अनुमति के ही एलोपैथिक दवाओं से भी इलाज कर नर्सिंग होम एक्ट की खुल्ले आम धज्जियां उड़ाई जाती है।

बहरहाल वर्तमान में इस आयुर्वेदिक दवाखाने का संचालन पूर्व की तरह बिना रोक टोक पुनः जारी है। खबर प्रकाशन के बाद अब यह देखना लाजिमी होगा कि स्वास्थ्य विभाग के सांठ-गांठ से लंबे समय से चल रहे शहर में इस जौसे तमाम बेलगाम दवाखानों पर जिला प्रशासन किस प्रकार का लगाम लगाता है। वही आनंद फार्मेंसी को पुनः संचालन की अनुमति के विषय मे रायगढ कलेक्टर भीम सिंह और chmo सूर्यकांत केशरी का कहना है कि संचालक को उसकी डिग्री के अनुरूप ही इलाज करने की अनुमति दी गई है। अर्थात वह अपने दवाखाने पर आयुर्वेद पध्दति से ही मरीजों का इलाज कर पायेगा।।

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