कैंसर की पहेली सुलझी : आनुवंशिकी तय करती है डीएनए क्षति और म्यूटेशन का स्तर

विज्ञान : धूमपान और सूर्य की रोशनी जैसे बाहरी कारणों के साथ व्यक्ति की आनुवंशिक बनावट भी कैंसर के खतरे को प्रभावित करती है
वैज्ञानिकों ने कैंसर से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पहेली को सुलझाने का दावा किया है। एक नए अध्ययन में यह सामने आया है कि किसी व्यक्ति की आनुवंशिक संरचना यह प्रभावित कर सकती है कि डीएनए को कितना नुकसान पहुंचेगा और शरीर में कितने म्यूटेशन विकसित होंगे।
यह शोध प्रतिष्ठित नेचर जर्नल में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन से यह समझने में मदद मिल सकती है कि क्यों कुछ धूमपान करने वालों को फेफड़ों का कैंसर नहीं होता, जबकि कुछ ऐसे लोग भी कैंसर की चपेट में आ जाते हैं जिन्होंने कभी धूमपान नहीं किया।
आनुवंशिकी और कैंसर का गहरा संबंध
कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार, कैंसर केवल जीवनशैली या पर्यावरणीय कारणों से नहीं होता, बल्कि इसमें व्यक्ति की विरासत में मिली आनुवंशिक विशेषताओं की भी बड़ी भूमिका होती है।
शोधकर्ताओं ने नियंत्रित परिस्थितियों में चूहों पर अध्ययन किया। अलग-अलग आनुवंशिक संरचना वाले चूहों को समान मात्रा में कैंसर उत्पन्न करने वाले रसायन के संपर्क में रखा गया। इसके बाद करीब 600 ट्यूमर के जीनोम का अध्ययन किया गया।
कैंसर रोकथाम और इलाज में मिलेगी मदद
अध्ययन से पता चला कि आनुवंशिक अंतर कैंसर के विकास की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में कैंसर स्क्रीनिंग और सटीक चिकित्सा (Precision Medicine) में आनुवंशिक जानकारी का उपयोग अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
शोधकर्ताओं ने बताया कि कैंसर पूरी तरह संयोग का परिणाम नहीं है। शरीर की आनुवंशिक बनावट यह तय करने में अहम भूमिका निभाती है कि कोशिकाएं डीएनए क्षति के बाद किस तरह प्रतिक्रिया करेंगी।
भविष्य में नई उम्मीद
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह खोज कैंसर के जोखिम को बेहतर ढंग से समझने, समय पर पहचान करने और मरीजों के लिए व्यक्तिगत उपचार योजना बनाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।







