रायगढ़

रायगढ़ एसएसपी शशि मोहन सिंह को राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया

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स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदान किया सम्मान

रायगढ़। रायगढ़ में एसएसपी के पद पर कार्यरत शशि मोहन सिंह को उत्कृष्ट पुलिस सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया है। 15 अगस्त को रायपुर में आयोजित स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। समारोह में छत्तीसगढ़ पुलिस के 11 अधिकारियों और कर्मचारियों को राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया, जिसमें एसएसपी शशि मोहन सिंह भी शामिल रहे।

1997 में राज्य पुलिस सेवा से शुरू किया करियर

शशि मोहन सिंह ने वर्ष 1997 में राज्य पुलिस सेवा में चयनित होकर अपने पुलिस करियर की शुरुआत की। सेवा के शुरुआती दौर में उन्होंने मध्यप्रदेश के होशंगाबाद, इटारसी और भोपाल सहित विभिन्न स्थानों पर अपनी सेवाएं दीं। छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद उन्होंने प्रदेश के अलग-अलग जिलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी निभाई जिम्मेदारी

वर्ष 2012 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी के रूप में शशि मोहन सिंह ने छत्तीसगढ़ के मैदानी क्षेत्रों के साथ-साथ चुनौतीपूर्ण नक्सल प्रभावित इलाकों में भी महत्वपूर्ण पुलिसिंग जिम्मेदारियां निभाईं।

कठिन परिस्थितियों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध नियंत्रण, आंतरिक सुरक्षा और जनसेवा के क्षेत्र में उनके कार्यों ने उन्हें एक अनुभवी और सशक्त पुलिस अधिकारी के रूप में पहचान दिलाई। उनके लंबे पुलिस सेवाकाल और उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया है।

अभिनेता, कवि और लेखक के रूप में भी पहचान

पुलिस सेवा के साथ शशि मोहन सिंह का व्यक्तित्व रचनात्मक गतिविधियों से भी जुड़ा रहा है। वे अभिनेता, कवि और लेखक के रूप में भी अपनी अलग पहचान रखते हैं। अपनी रचनात्मक अभिरुचियों के माध्यम से उन्होंने समाज और पुलिस के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने, संवेदनशील पुलिसिंग को बढ़ावा देने और सकारात्मक सामाजिक संदेशों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है।

रायगढ़ पुलिस परिवार में खुशी का माहौल

एसएसपी शशि मोहन सिंह को राष्ट्रपति पुलिस पदक मिलने से रायगढ़ पुलिस विभाग और जिले में खुशी का माहौल है। उनके सम्मान को पुलिस सेवा के प्रति समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा और उल्लेखनीय योगदान की पहचान के रूप में देखा जा रहा है।

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