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अंबूजा कोयला खदान जनसुनवाई के विरोध में ग्रामीणों का प्रदर्शन तेज, कलेक्टर कार्यालय के सामने दिया धरना

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रायगढ़। अंबूजा कोल माइंस की प्रस्तावित जनसुनवाई को रद्द करने की मांग को लेकर रायगढ़ जिले के कई गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने गुरुवार को जिला मुख्यालय में जोरदार प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां लिए ग्रामीणों ने रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय के सामने धरना दिया। इस आंदोलन को खरसिया विधायक उमेश पटेल तथा धरमजयगढ़ विधायक लालजीत राठिया का समर्थन भी मिला।

गौरतलब है कि 11 नवंबर को अंबूजा कोयला खदान परियोजना से संबंधित जनसुनवाई प्रस्तावित है। प्रभावित गांव पुरूंगा, सांभरसिंघा, तेंदूमूड़ी, कोकदार सहित अन्य पंचायतों के ग्रामीणों ने कहा कि यह क्षेत्र पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, जहाँ पेसा कानून लागू है। ऐसे में किसी भी परियोजना पर अंतिम निर्णय ग्रामसभा की अनुमति से ही संभव है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन मौखिक तौर पर जनसुनवाई के लिए ग्रामसभा की सहमति मिलने की बात कह रहा है, जबकि ग्रामसभाओं ने सर्वसम्मति से इस जनसुनवाई को निरस्त करने का प्रस्ताव पारित कर पहले ही प्रशासन को भेज दिया था। इसके बावजूद अब तक कोई लिखित जवाब नहीं दिया गया, जिससे ग्रामीणों में नाराज़गी बढ़ गई है।

धरना स्थल पर मौजूद ग्रामीणों का कहना था कि यह परियोजना अडाणी समूह से जुड़ी है और वे अपने जल, जंगल और ज़मीन को किसी भी कंपनी के हवाले नहीं करेंगे। प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि जब तक जनसुनवाई रद्द करने की आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक उनका धरना जारी रहेगा। कई ग्रामीणों ने वहीं पर भोजन बनाने और रात्रि विश्राम की व्यवस्था भी कर ली है।

विधायक उमेश पटेल ने प्रदर्शनकारी ग्रामीणों का समर्थन करते हुए कहा कि ग्रामसभा की सहमति के बिना जनसुनवाई करना नियमों के खिलाफ है और इसे तत्काल रद्द किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासन पर कंपनियों को लाभ पहुँचाने के लिए फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव दिखाने का आरोप लगाया।

इधर इस विषय पर रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने कहा कि जनसुनवाई का उद्देश्य ही ग्रामीणों की बात सुनना है। प्रशासन संवाद के माध्यम से स्थिति को स्पष्ट करने का प्रयास कर रहा है। जनसुनवाई रद्द न करने को उन्होंने उचित बताते हुए कहा कि ग्रामीणों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।

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