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रायगढ़ : जेपीएल के गारे पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक की 14 अक्टूबर को जनसुनवाई, ग्रामीणों ने उठाई गंभीर आपत्तियां

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रायगढ़। जिले में बड़े कोल ब्लॉकों के संचालन की प्रक्रिया तेज हो गई है। महाजेंको और एसईसीएल के बाद अब जिंदल पावर लिमिटेड (जेपीएल) के नए कोल ब्लॉक की जनसुनवाई की तारीख घोषित कर दी गई है। जानकारी के अनुसार, आगामी 14 अक्टूबर को गारे पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक के लिए धौंराभांठा में जनसुनवाई आयोजित की जाएगी।

जिले में तीन बड़े कोल ब्लॉकों के विकसित होने से सालाना करीब 50 मिलियन टन कोयला उत्पादन की संभावना है, जो वर्तमान में रायगढ़ जिले के कुल उत्पादन के बराबर होगा। जेपीएल के गारे पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक से अकेले 15 मिलियन टन वार्षिक उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। यहां ओपन कास्ट और अंडरग्राउंड दोनों पद्धतियों से खनन किया जाएगा।

भूमि अधिग्रहण और प्रभावित गांव

इस कोल ब्लॉक के लिए कुल 3020 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जानी है, जिसमें से लगभग 120 हेक्टेयर वनभूमि शामिल है। प्रभावित होने वाले गांवों में बुडिय़ा, रायपारा, बागबाड़ी, आमगांव, झिंकाबहाल, खुरुसलेंगा, धौराभांठा, बिजना, लिबरा, महलोई, तिलाईपारा, समकेरा, झरना और टांगरघाट शामिल हैं। इन गांवों की भूमि जेपीएल द्वारा अधिग्रहित की जाएगी।

पूर्व में महाजेंको के गारे पेलमा सेक्टर-2 कोल ब्लॉक में जंगल कटाई को लेकर भारी विरोध हुआ था। यही कारण है कि स्थानीय ग्रामीण अब जेपीएल के इस कोल ब्लॉक के प्रति भी गंभीर चिंता जता रहे हैं।

कोल ब्लॉक आवंटन का इतिहास

गारे पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक पहले सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के लिए आरक्षित था और इसका आवंटन गुजरात स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड को किया गया था। हालांकि कंपनी ने बाद में इसे सरेंडर कर दिया। इसके बाद कोयला मंत्रालय ने खदान को नीलामी में डाला, जहां जेपीएल ने इसे हासिल किया।

ग्रामीणों की आपत्तियां और मांगें

27 अगस्त को तमनार तहसीलदार ने संबंधित ग्राम पंचायतों को 15 दिनों के भीतर ग्राम सभा आयोजित करने का आदेश दिया था। लेकिन प्रभावित गांवों के निवासियों ने प्रस्तावित कोल ब्लॉक को लेकर कई गंभीर आपत्तियां दर्ज की हैं। ग्रामीणों ने एसडीएम को पत्र सौंपकर कहा है कि जब तक स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती, वे ग्राम सभा आयोजित नहीं करेंगे।

ग्रामीणों ने जो प्रमुख मांगें उठाई हैं, उनमें शामिल हैं:

  • प्रभावित क्षेत्र की सीमाओं का विस्तृत विवरण।
  • खनन से जुड़े जोखिम और पर्यावरणीय प्रभाव की जानकारी।
  • भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया और मुआवजे की दरों का स्पष्ट खुलासा।
  • विस्थापितों के लिए पुनर्वास नीति और रोजगार के अवसर।
  • भूमिहीन परिवारों और प्रमाणित किसानों के लिए विशेष प्रावधान।
  • महिलाओं के लिए सुविधाएं और सामाजिक ढांचे की सुरक्षा।
  • मुआवजा राशि का भुगतान सरकार करेगी या कंपनी, इसका स्पष्टीकरण।
  • प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरणीय क्षति रोकने के उपाय।

स्थिति अब भी संवेदनशील

ग्रामीणों का कहना है कि बिना पर्याप्त जानकारी और जल्दबाजी में प्रक्रिया पूरी करना स्थानीय निवासियों के लिए खतरनाक साबित होगा। पहले चरण में 77.019 हेक्टेयर राजस्व वन भूमि को टारगेट किया गया है, ताकि खदान में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू की जा सके।

जनसुनवाई के नजदीक आते ही प्रभावित गांवों में विरोध और असंतोष की स्थिति बनी हुई है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और कंपनी प्रबंधन ग्रामीणों की मांगों पर क्या ठोस कदम उठाते हैं।

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