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रायगढ़ : पहली धुलाई में साड़ी का रंग उड़ने पर उपभोक्ता फोरम सख्त, दुल्हन साड़ी सेंटर को 14,870 रुपए मुआवज़ा देने का आदेश

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रायगढ़ शहर के मशहूर दुल्हन साड़ी सेंटर से खरीदी गई साड़ी का रंग पहली ही धुलाई में उड़ जाने के मामले में उपभोक्ता फोरम ने उपभोक्ता के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शिकायतकर्ता देवेन्द्र कुमार पाण्डेय द्वारा दर्ज वाद की सुनवाई के बाद फोरम ने दुकानदार को दो साड़ियों की कीमत 7,870 रुपए, साथ ही मानसिक क्षतिपूर्ति और वाद व्यय मिलाकर कुल 14,870 रुपए 45 दिनों के भीतर अदा करने का आदेश दिया है।

मामला कैसे शुरू हुआ

रायगढ़ के दरोगापारा निवासी देवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने 13 अक्टूबर 2024 को दुल्हन साड़ी सेंटर से कुल पांच साड़ियां 13,920 रुपए में खरीदी थीं। ग्राहक का कहना था कि दुकान संचालक ने साड़ियों की गुणवत्ता, रंग और प्रिंट के बारे में विशेष भरोसा दिलाया था।

कुछ दिनों बाद जब दो साड़ियों की पहली धुलाई की गई, तो दोनों साड़ियों का रंग बुरी तरह निकल गया। ग्राहक ने इसकी शिकायत दुकानदार से की, जिसके बाद दुकानदार ने त्रुटि स्वीकार करते हुए साड़ियां अल्टरेशन व केमिकल वॉश के लिए रख लीं।

वॉश के बाद भी नहीं मिली गुणवत्ता

2 दिसंबर 2024 को दुकानदार ने दोनों साड़ियां वापस कर दीं, लेकिन देवेन्द्र पाण्डेय के अनुसार साड़ियों का मूल स्वरूप बहाल नहीं हुआ था और रंग में भी कोई फर्क नहीं आया था। जब क्रेता ने दोनों साड़ियां वापस लेने और 7,870 रुपए लौटाने की मांग की, तो दुकानदार ने ऐसा करने से साफ इंकार कर दिया और कथित रूप से दुर्व्यवहार भी किया।

इसके बाद ग्राहक ने अधिवक्ता के माध्यम से दुकानदार को कानूनी नोटिस भेजा। दुकानदार ने अपने जवाब में रंग निकलने के लिए ग्राहक की धुलाई पद्धति और इस्तेमाल किए गए डिटर्जेंट को जिम्मेदार बताया। समाधान न मिलने पर देवेन्द्र पाण्डेय ने उपभोक्ता फोरम में वाद दायर किया।

उपभोक्ता फोरम का निर्णय

फोरम के अध्यक्ष छमेश्वरलाल पटेल तथा सदस्य राजेन्द्र पाण्डेय और राजश्री अग्रवाल की बेंच ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद माना कि दुकानदार द्वारा साड़ी वापस लेने से इनकार करना और उचित गुणवत्ता न देना अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है।

फोरम ने अपने आदेश में यह निर्देश दिया—

  • साड़ी की कीमत लौटाई जाए : 7,870 रुपए
  • मानसिक क्षतिपूर्ति : 5,000 रुपए
  • वाद व्यय : 2,000 रुपए
  • कुल देय राशि : 14,870 रुपए, जिसे 45 दिनों के भीतर अदा करना अनिवार्य होगा।

उपभोक्ता फोरम के इस फैसले को उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है, जो अन्य दुकानदारों और व्यवसायियों के लिए भी स्पष्ट संदेश है कि गुणवत्ता में धोखाधड़ी या उपभोक्ता शोषण पर कानूनी कार्रवाई तय है।

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