छत्तीसगढ़

नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती युवक की मौत: परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप, केयरटेकर ने माना दस्तावेज अधूरे

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जिले के एक नशा मुक्ति केंद्र में अचानक युवक की मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि 12 हजार रुपये महीना फीस पर युवक को भर्ती किया गया था, लेकिन एक दिन पहले अचानक तबीयत बिगड़ गई।

मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल परिसर स्थित एक नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती युवक सुरेंद्र राठौर की मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों ने हंगामा किया और मौत की परिस्थितियों पर संदेह जताया। सुरेंद्र शक्ति जिले के केसला निवासी था और नशे की लत से ग्रसित था।

परिजनों ने उसे उपचार के लिए केंद्र में भर्ती कराया था। मृतक के पिता चुन्नी लाल राठौर ने बताया कि उन्हें ऑनलाइन जानकारी मिली थी। 26 तारीख को चार लोग घर आए और सुरेंद्र को कोरबा ले गए। उन्होंने वाहन किराया दो हजार रुपये, महीने का बारह हजार रुपये इलाज व रखरखाव का लिया। ब्लड टेस्ट के तीन हजार रुपये भी तुरंत लिए गए।

28 तारीख को सीसीटीवी के माध्यम से परिजनों से बातचीत हुई, तब वह स्वस्थ था। 30 तारीख को तबीयत खराब होने की सूचना मिली, पहुंचने पर उसकी मौत हो चुकी थी। परिजनों ने मौत की परिस्थितियों पर जांच और कार्रवाई की मांग की है। मृतक के पिता ने बताया कि सुरेंद्र तीन बेटियों में इकलौता पुत्र था और छह माह पहले शराब का आदी हो गया था।

नशा मुक्ति केंद्र के केयरटेकर राजू राजपूत ने बताया कि यह केंद्र जीवन आशा फाउंडेशन के नाम से संचालित है। यह समाज कल्याण विभाग के मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है। राजपूत के अनुसार, सुरेंद्र स्वस्थ था, लेकिन नशा छोड़ने पर अचानक झटका आने से उसकी मौत हुई होगी। उसने यह भी स्वीकार किया कि केंद्र संचालित करने के लिए उसके पास अधूरे दस्तावेज हैं।

राजपूत ने बताया कि जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टर अंकित गुप्ता इलाज करते हैं। केंद्र में एक माह का बारह हजार रुपये शुल्क रखा गया है। कोरबा सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि पोड़ी बहार खरमोरा स्थित केंद्र में युवक की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों ने मौत को लेकर संदेह व्यक्त किया है, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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