ईरान के हमलों के बीच भारत ने डॉलर पर निर्भरता घटाई, तेल की खरीदारी अब रुपये में

मिडिल-ईस्ट युद्ध के बीच भारत ने दिखाया आर्थिक और कूटनीतिक दम
ईरान द्वारा मिडिल-ईस्ट में अमेरिका के सैन्य और ऊर्जा ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद वैश्विक ऊर्जा और वित्तीय बाजारों में हड़कंप मचा हुआ है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान की दबंगई के कारण डॉलर आधारित लेन-देन प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन भारत ने इस स्थिति में अपनी मुद्रा में तेल खरीदने का बड़ा कदम उठाया है।
भारत की रणनीति और डॉलर का मुकाबला
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियां अब रूसी तेल की खरीदारी के लिए अमेरिकी डॉलर पर निर्भर नहीं हैं। इसके बजाय रुपयों में भुगतान किया जा रहा है, जिसे विदेशी खातों में जमा कर दिरहम या युआन में बदल दिया जाता है। इस बदलाव से:
- अमेरिकी डॉलर आधारित सिस्टम से बचाव होता है।
- रूस के साथ लेन-देन में स्थायित्व और सुरक्षा बढ़ती है।
- भारत अपनी मुद्रा को मजबूत करता है और डी-डॉलराइजेशन की दिशा में बड़ा कदम उठाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और ऊर्जा सुरक्षा का प्रतीक है।
रूस से तेल आयात और भविष्य की तैयारी
अप्रैल 2026 के लिए भारत ने रूस से लगभग 6 करोड़ बैरल तेल खरीदा है। यह आपूर्ति मध्य-पूर्व युद्ध के कारण सप्लाई में आई कमी को पूरा करने में मदद करेगी। इससे पहले रूस से तेल की खरीद में कीमतों के कारण थोड़ी गिरावट आई थी, लेकिन अब भारत ने रणनीतिक रूप से इसे बढ़ा दिया है।
वैश्विक प्रभाव
भारत द्वारा रुपये में भुगतान करने का कदम वैश्विक स्तर पर डॉलर की दादागिरी को चुनौती देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में इससे रुपया मजबूत हो सकता है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भारत का आर्थिक प्रभाव बढ़ेगा।






