रायगढ़ नगर निगम ने बड़े बकायेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी

रायगढ़ नगर निगम प्रशासन ने प्रॉपर्टी टैक्स वसूली अभियान को तेज करते हुए लंबे समय से बकाया रखने वाले करदाताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत अब कुर्की, सीलिंग और अन्य वैधानिक कदम उठाए जाएंगे।
निगम आयुक्त ने की समीक्षा बैठक
निगम आयुक्त बृजेश सिंह क्षत्रिय ने राजस्व शाखा की समीक्षा बैठक लेकर प्रत्येक वार्ड की वसूली प्रगति का जायजा लिया। बैठक में सहायक राजस्व निरीक्षकों एवं अमले द्वारा किए गए दैनिक कार्यों की समीक्षा की गई और वसूली में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। आयुक्त ने कहा कि निर्धारित लक्ष्य समयसीमा में पूरा करना प्राथमिकता है और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
निगम के निशाने पर बड़े बकायेदार
निगम के अभिलेखों के अनुसार कई बड़े करदाताओं द्वारा वर्षों से टैक्स जमा नहीं किया गया है। प्रमुख बकायेदारों में शामिल हैं:
- रामनिवास टॉकीज मलिक भगवती देवी लक्ष्मण दास – ₹1,52,789
- मांझी डेयरी संचालक सुधीर मांझी राघवेंद्र मांझी – ₹4,12,531
- मुरारी होटल परिसर संचालक दीनदयाल गणपत राय गुलाब देवी गणपत राय – ₹2,20,091
- पानी फिल्टर मशीन संस्थान संचालक महादेई गुलाब राय अजय सिंघानिया – ₹3,99,641
- बीड़पारा कपड़ा थोक विक्रेता श्रवण केजरीवाल, महावीर अग्रवाल – ₹2,91,831
- लक्ष्मीचंद शर्मा (नर्सरी संचालक) – ₹2,04,000
- एचपी डेवलपर्स/ गीता देवी/ हनुमान/ अमित अग्रवाल – ₹1,49,000
- शिवम मोटर्स – ₹2,90,000
- सन राइस मिल – ₹4,00,000
- हसमतराय – ₹1,21,000
- निरंजन अग्रवाल (महालक्ष्मी ट्रेडर्स) – ₹93,000
- लक्ष्मी बोरवेल्स – ₹1,79,000
- सांवरिया बिल्डिंग (बजरंग अग्रवाल/मातु अग्रवाल) – ₹1,76,000
- संजू देवी/चंद्रमा सिंह – ₹1,91,000
- ईदनदास – ₹1,11,000
इन सभी मामलों में निगम प्रशासन लगातार संपर्क कर रहा है, लेकिन भुगतान नहीं होने पर अब कुर्की, सीलिंग और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बकायेदारों से अपील
आयुक्त श्री क्षत्रिय ने सभी बकायेदारों से अपील की है कि वे तत्काल अपने बकाया प्रॉपर्टी टैक्स का भुगतान करें। उन्होंने बताया कि 31 मार्च तक कार्यालय समय में राजस्व शाखा में संपत्ति, समेकित, जलकर एवं यूजर चार्ज का भुगतान किया जा सकता है। इससे बकायेदार अतिरिक्त सर चार्ज देने और कुर्की, सीलिंग तथा अन्य वैधानिक कार्रवाई से बच सकते हैं।






