छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में शराब पैकेजिंग को लेकर विवाद, प्लास्टिक बोतलों के फैसले का विरोध

Advertisement

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शराब की पैकेजिंग में कांच की जगह प्लास्टिक बोतलों के उपयोग के प्रस्तावित फैसले को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस निर्णय के विरोध में छत्तीसगढ़ बोतल संघ ने आबकारी विभाग से मुलाकात कर अपना विरोध दर्ज कराया है।

आबकारी कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन

संघ के प्रतिनिधिमंडल ने आबकारी कमिश्नर आर. सांगीता से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की। संघ ने कहा कि अचानक लिए गए इस निर्णय से व्यापारियों के पास मौजूद कांच की बोतलों का बड़ा स्टॉक फंस गया है, जिससे भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है।

छह महीने का समय देने की मांग

संघ ने मांग की है कि यदि सरकार यह व्यवस्था लागू करती है तो पहले से मौजूद स्टॉक को खत्म करने के लिए कम से कम छह महीने का समय दिया जाए। उनका कहना है कि बिना तैयारी के इस बदलाव से छोटे व्यापारियों पर गंभीर असर पड़ेगा।

आजीविका पर संकट की आशंका

छत्तीसगढ़ बोतल संघ ने बताया कि कांच की बोतलों के संग्रहण और रीसाइक्लिंग से राज्य में हजारों गरीब परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। ऐसे में यह निर्णय लागू होने पर इन परिवारों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है।

स्वास्थ्य और पर्यावरण को लेकर चिंता

संघ ने प्लास्टिक बोतलों के उपयोग को लेकर स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी चिंताएं भी जताईं। उनका कहना है कि प्लास्टिक में शराब रखने से रासायनिक प्रतिक्रिया और माइक्रोप्लास्टिक का खतरा बढ़ सकता है, वहीं प्लास्टिक कचरे की समस्या भी गंभीर रूप ले सकती है।

विभाग ने दिया आश्वासन

आबकारी कमिश्नर ने संघ की मांगों और चिंताओं को ध्यानपूर्वक सुनते हुए उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। वहीं संघ ने स्पष्ट किया कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन व्यापारियों और मजदूरों के हितों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी।

शराब पैकेजिंग में बदलाव का यह प्रस्ताव जहां एक ओर प्रशासनिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इससे जुड़े आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर बहस तेज हो गई है। आने वाले दिनों में सरकार के अंतिम निर्णय पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

Advertisement
Advertisement

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button