छत्तीसगढ़

खरीफ सीजन से पहले किसानों के लिए बड़ी तैयारी: रायपुर में यूरिया, DAP समेत खादों का युद्धस्तर पर भंडारण शुरू

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खरीफ सीजन के लिए इस बार रायपुर जिले के किसानों को यूरिया, डीएपी, पोटाश, एसएसपी तथा एनपीके उपलब्ध कराने युद्ध स्तर पर भंडारण किया जा रहा है। 

रायपुर। खरीफ सीजन के लिए इस बार रायपुर जिले के किसानों को यूरिया, डीएपी, पोटाश, एसएसपी तथा एनपीके उपलब्ध कराने युद्ध स्तर पर भंडारण किया जा रहा है। इसके बाद भी इन सभी उर्वरक में कोई भी भंडारण लक्ष्य के 50 प्रतिशत तक पहुंच नहीं पाया है। कृषि विभाग के अधिकारियों से मिले आंकड़ों के अनुसार जिले में इस बार सभी उर्वरक मिलाकर 75 हजार 7 सौ मीट्रिक टन भंडारण करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसकी तुलना में अब तक कुल 28 हजार 284 मीट्रिक टन उर्वरक का भंडारण हुआ है।

डीएपी-पोटाश एवं एसएसपी का भंडारण सबसे कम
भंडारण के मिले आकड़ों के अनुसार,  जिले को यूरिया 34800, डीएपी 19000, पोटाश 4300, एसएसपी 5100 तथा एनपीके 12500 मीट्रिक टन उर्वरक भंडारण करने का लक्ष्य है। इसके विरुद्ध यूरिया 14255, डीएपी 5083 पोटाश 1751, एसएसपी 2534 तथा एनपीके 4661 मीट्रिक टन उर्वरक का भंडारण हो चुका है। इस तरह कोई भी उर्वरक का भंडारण 50 प्रतिशत पहुंचा नहीं है।

7504 मीट्रिक टन उर्वरक वितरित
भंडारण किए गए उर्वरक किसानों की मांग पर वितरण भी किया जा रहा है। अधिकारी के अनुसार अब तक यूरिया 3638, डीएपी 1261, पोटाश 431, एसएसपी 611 तथा एनपीके 1563 कुल 7504 मीट्रिक टन वितरण किया जा चुका है।

विशेषज्ञों की सलाह, डीएपी पर निर्भर रहना जोखिम
इधर, कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि,  किसानों को केवल डीएपी. पर निर्भर रहना जोखिम है। इससे मिट्टी का संतुलन भी बिगड़ सकता है। बेहतर फसल उत्पादन और मिट्टी के स्वास्थय को बनाए रखने के लिए संतुलित उर्वरकों का उपयोग बेहद जरूरी है। धान जैसी प्रमुख खरीफ फसल के लिए यूरिया, फॉस्फेट, पोटाश और एनपीके जैसे उर्वरकों का सही मात्रा में प्रयोग करना लाभकारी साबित होता है तथा डीएपी पर निर्भरता कम कर इसे वैकल्पिक उर्वरक के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है।

नील हरित काई, हरी खाद-जैव उर्वरक का करें इस्तेमाल
विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की है कि वे नील हरित काई, हरी खाद तथा जैव उर्वरक (बायो-फर्टिलाइजर्स) का उपयोग करें। इससे रासायनिक उर्वरकों के निर्भरता पर कमी लाएगी। किसान बोरियों वाली खाद के स्थान पर नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी (तरल) को प्राथमिकता दें। यह न केवल परिवहन में आसान है बल्कि इसकी उपयोग क्षमता 90 प्रतिशत तक है। इसके छिड़काव से फसल को सीधा पोषण मिलता है और जमीन भी खराब नहीं होती।

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