Health Employees Protest Raigarh : लंबित मांगों को लेकर स्वास्थ्य कर्मचारियों का प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

रायगढ़। लंबित मांगों के निराकरण की मांग को लेकर स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने बुधवार को रायगढ़ में विरोध-प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने स्वास्थ्य विभाग के निजीकरण, ठेका प्रथा और आउटसोर्सिंग का विरोध करते हुए नारेबाजी की तथा रैली निकालकर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
मिनी स्टेडियम से कलेक्ट्रेट तक निकाली रैली
स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के पदाधिकारी और सदस्य मिनी स्टेडियम में एकत्र हुए, जहां उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए। इसके बाद कर्मचारी पैदल रैली निकालते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।
पुनरीक्षित वेतनमान पर जल्द निर्णय की मांग
ज्ञापन में बताया गया कि स्वास्थ्य कर्मचारियों के पुनरीक्षित वेतनमान का प्रस्ताव स्वास्थ्य विभाग पहले ही शासन को भेज चुका है, लेकिन अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। कर्मचारियों ने कहा कि वर्ष 2023 में इसी मांग को लेकर अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन किया गया था, जिसे शासन के आश्वासन के बाद स्थगित किया गया था। अब भी निर्णय नहीं होने से कर्मचारियों में नाराजगी है।
निजीकरण और आउटसोर्सिंग पर रोक लगाने की मांग
संघ ने स्वास्थ्य विभाग में निजीकरण, ठेका प्रथा और आउटसोर्सिंग पर रोक लगाने की मांग की। कर्मचारियों का कहना है कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होती है। साथ ही प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े सभी कर्मियों का अनिवार्य पंजीयन कर फर्जी डिग्री और अपात्र लोगों की पहचान सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई।
रिक्त पदों पर भर्ती और समान वेतन की मांग
स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने बताया कि विभाग में 35 से 40 प्रतिशत पद रिक्त हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने रिक्त पदों पर शीघ्र सीधी भर्ती, संविदा एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए “समान काम, समान वेतन” की नीति लागू करने तथा जीवनदीप समिति के कर्मचारियों के लिए पूरे प्रदेश में समान मानदेय निर्धारित करने की मांग की।
स्वास्थ्य आयोग गठन की भी उठाई मांग
ज्ञापन में नियमित रूप से कार्यरत संविदा एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए नियमित पद स्वीकृत करने तथा प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए स्वास्थ्य आयोग के गठन की मांग भी की गई।







