माँ विहार कालोनी के हालात भयावह,आधी-अधूरी कालोनी शाम को बन जाती है असामाजिक तत्वों का डेरा..।।

सपनों के आशियाने पर लालच और फरेब के बादल…। झूठ बोलकर धोखेबाजी से बेच दी कालोनी की जमीन।रहवासी हो रहे है परेशान..।।
सिंहघोष/रायगढ़-21.7.21अच्छे वातावरण में सुंदर सा घर बनाना हर किसी का सपना होता है। इस सपने की आड़ में कुछ धूर्त और पेशेवर लोग ठगी के ऐसे काम कर धन कमा लेते है जिसका हर्जाना तमाम उन मासूम लोगों को भुगतना पड़ता है,जिन्होंने उनकी बातों में आकर ऐसी कालोनियों में अपना सुंदर घर बनाने या जमीन खरीदने का फैसला लिया होता है। वे लोग अपने जीवन भर की कमाई पूंजी और बैंकों से लिये लाखों के कर्ज लेकर ऐसे स्थानों में जमीन या घर खरीद कर उलझ जाते है। जहां न तो उनकी खरीदी गई संपत्ति की उचित कीमत मिलती है न ही सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएं(जो शासन के द्वारा प्रत्येक कालोनी के लिए अनिवार्य की गई हैं)मिल पाती है। ऐसे में उन्हें मन मारकर या इस तरह की कालोनियों में रहना पड़ता है या या खरीदी गई संपत्ति को नुकसान में बेचना पड़ता है।।
वैसे तो शहर में जमीन के कारोबार से जुड़े कुछ नवोदित बिल्डरों की बनाई तमाम कालोनियों में कुछ न कुछ कमियां रही हैं। परन्तु मां विहार बोइरदादर से बंगुरसिया रोड में स्थित एक ऐसी अविकसित कालोनी है,जिसके विषय मे यह कहा जाना गलत नही होगा कि कालोनी के मालिकों ने सफेद झूठ बोलकर,धोखे से कई जरूरतमंदों को यहां के प्लाट बेचे है। निवेशकों ने तब उनकी बातों में यह सोचकर भरोसा कर लिया कि माँ-विहार में खरीदी गई,संपत्तियां न केवल भविष्य में घर बनाने के लिहाज से बल्कि बेचने पर भी अच्छा लाभ देगा। हालाकि कुछ महीनों और सालों बाद उनके सपने टूटने लगे। कालोनी निर्माताओं ने सम्पत्तियां बेचकर कालोनी को उपेक्षित छोड़ दिया।इधर कालोनी की सड़कें और बाउंड्रीवाल टूटने लगीं। कालोनी के अधिकांश भूखण्ड(प्लांट्स) बेचने के बाद भी कालोनी में कम्युनिटी पार्क,मन्दिर और स्ट्रीट लाइट्स नही लगाई गई।
यही नही बीते 3 सालों से यहां रह रहे करीब 20 परिवार वालों की सुरक्षा के लिए कालोनी के मुख्य गेट पर सुरक्षा-प्रहरी नियुक्त नही किया गया। जिसकी वजह से कालोनी में बना ews फ्लैट असमाजिक तत्वों का अड्डा बन गया है। शाम होते ही क्षेत्र के शराबी और आवारा किस्म के लोग यहां शराब,जुआ और अन्य प्रकार की अभद्र गतिविधियां करने आ जाते है। इस वजह से कालोनी का माहौल काफी दूषित हो जाता है। विशेषकर महिलाओं और बच्चों के लिए हालात बुरे हो जाते है। छुटिटयों के समय पूरे दिन शराबी और गंजेडीयों। का जमावड़ा बना रहता है। उन्हके मन करने पर विवाद की स्थिति बन जाती है। कालोनी में न तो स्ट्रीट लाइट लगी है न ही आवश्यक सुरक्षा उपकरण लगाए गए है। बाउंड्री वाल भी कई जगहों से गिरने की स्थिति में आ गई है।
यहां रहने वाले प्रह्लाद देवांगन का कहना है कि पूरी लापरवाही कालोनी निर्माताओं की है हम अपनी समश्याओं को लेकर दो सालों से उनसे निवेदन कर रहे है,उनके तरफ से कोई सहयोग नही मिला है। अंततः हमने अब कलेक्टर सर और निगम आयुक्त से शिकायत की है। इस कालोनी की हालत आप अपनी आंखों से देख सकते है,सभी प्लॉट बिक जाने के बावजूद अधिकांश लोग कालोनी की हालत देखकर प्लॉट बेचकर निकल जाने में ही भलाई समझ रहे है।।
वही माँ विहार कालोनी में रहने वाली श्रीमती पुष्पा बरेठ का कहना है कि मालिकों ने धोखा देकर हमे इस कालोनी में प्लाट बेचा,आज हालत ऐसी है कि माँ विहार शहर की सबसे पिछड़ी और असुरक्षित कालोनी बन गईं है। पूरे दिन सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं के लिए हमे संघर्ष करना पड़ता है। घर के पुरुष बाहर जातें है तो महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन जाती है।।
वही एक अन्य कालोनी वासी का कहना ही अगर आप मां-विहार कालोनी में रीसेल में प्लाट या घर खरीदने का प्लान कर रहे है तो एक बार पुनः विचार जरूर कर लीजियेगा। अन्यथा आपकी जीवन भर की कमाई और परिवार की सुरक्षा हमेशा खतरे में पड़ी रहेगी।। मेरी प्रशासन से मांग है कि कालोनी निर्माताओं के विरुद्ध झूठ बोलकर अविकसित और असुरक्षित कालोनी में महंगे दामों पर प्लाट बेचने के नाम पर दण्डात्मक कार्यवाही की जाए।। तब उन्हें हमारा दर्द समझ मे आएगा।।












