बिलासपुर प्रेस क्लब विवाद : कार्यकारिणी सदस्य पर FIR, पूर्व अध्यक्ष ने डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की मांग उठाई

बिलासपुर। बिलासपुर प्रेस क्लब से जुड़े विवाद में कार्यकारिणी सदस्य कैलाश यादव के खिलाफ सिविल लाइन थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पूर्व अध्यक्ष इरशाद अली ने पुलिस की कार्रवाई और शिकायतों की जांच के तरीके को लेकर सवाल उठाते हुए डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर उचित कानूनी धाराएं लगाने की मांग की है।
व्हाट्सऐप ग्रुप में कथित अभद्र टिप्पणी का आरोप
विवाद बिलासपुर प्रेस क्लब के अधिकृत व्हाट्सऐप ग्रुप में कथित तौर पर की गई टिप्पणियों से जुड़ा बताया जा रहा है। पूर्व अध्यक्ष की शिकायत के अनुसार, ग्रुप में उनके खिलाफ अशोभनीय भाषा और कथित धमकी भरे संदेश पोस्ट किए गए। शिकायत के साथ चैट और स्क्रीनशॉट जैसे डिजिटल साक्ष्य भी पुलिस को उपलब्ध कराए जाने की बात कही गई है।
पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल
पूर्व अध्यक्ष का आरोप है कि डिजिटल साक्ष्य उपलब्ध होने के बावजूद पुलिस ने मामले में आईटी कानून की धाराओं के तहत कार्रवाई नहीं की। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विधिवत परीक्षण कराने की मांग की है।
काउंटर FIR को लेकर भी सवाल
मामले में कैलाश यादव की ओर से भी कथित धमकी को लेकर शिकायत किए जाने के बाद पूर्व अध्यक्ष इरशाद अली के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। पूर्व अध्यक्ष पक्ष का आरोप है कि इस शिकायत पर पुलिस ने अपेक्षाकृत तेजी से कार्रवाई की, जबकि उनकी शिकायत में उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच को लेकर अलग रवैया अपनाया गया।
निष्पक्ष जांच की मांग
पूर्व अध्यक्ष ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूरे विवाद की निष्पक्ष और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच की मांग की है। उनका कहना है कि दोनों पक्षों की शिकायतों की समान तरीके से जांच होनी चाहिए और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच के बाद ही कानूनी कार्रवाई तय की जानी चाहिए।






