विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री साय सख्त, हॉस्टल-पीजी से लेकर स्कूलों तक सेफ्टी ऑडिट के निर्देश

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा— हादसे के बाद कार्रवाई नहीं, संभावित खतरे की पहले पहचान कर रोकथाम पर दें जोर
रायपुर। विद्यार्थियों और आम नागरिकों की सुरक्षा को शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशभर में शैक्षणिक संस्थानों और विद्यार्थियों से जुड़े परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन की जिम्मेदारी केवल किसी दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि संभावित खतरों की पहले से पहचान कर उन्हें दूर करना भी जरूरी है।
हॉस्टल, पीजी और कोचिंग सेंटरों का तत्काल निरीक्षण
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी संभागायुक्तों, पुलिस महानिरीक्षकों, कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों तथा वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित किया।
बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में हॉस्टल, पीजी, कोचिंग सेंटर, स्कूल और बड़े शैक्षणिक भवनों का तत्काल निरीक्षण एवं सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान जहां भी सुरक्षा संबंधी कमियां सामने आएं, वहां सुधार के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए और निर्धारित अवधि में आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए।
कलेक्टर-एसपी को नियमित निगरानी की जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों से कहा कि वे अपने-अपने जिलों में सुरक्षा व्यवस्था की नियमित निगरानी करें। उन्होंने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि शासन द्वारा जारी सुरक्षा संबंधी निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका असर जमीनी स्तर पर भी दिखाई दे।
जर्जर भवनों की भी होगी जांच
मुख्यमंत्री ने स्कूलों, पुस्तकालयों, छात्रावासों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर मौजूद पुराने एवं जर्जर भवनों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे भवन, जिनकी स्थिति जोखिमपूर्ण है या जिनसे जनहानि की आशंका हो सकती है, उनकी पहचान तत्काल की जाए और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
दुर्घटना का इंतजार नहीं, पहले से हो जोखिम की पहचान
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान कर दुर्घटना की आशंका को पहले ही खत्म किया जा सके। उन्होंने विशेष रूप से बच्चों और विद्यार्थियों से जुड़े संस्थानों में सुरक्षा मानकों के पालन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
सतत निगरानी की कार्यसंस्कृति विकसित करने पर जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जिलों में सुरक्षा संबंधी निरीक्षण की प्रभावी और नियमित व्यवस्था विकसित की जाए। केवल शिकायत मिलने या दुर्घटना होने के बाद कार्रवाई करने की प्रवृत्ति से आगे बढ़कर सतत निगरानी, समयबद्ध सुधार और पूर्व-सावधानी की कार्यसंस्कृति विकसित करने की जरूरत है।






