छत्तीसगढ़ में UCC की तैयारी तेज, शीतकालीन सत्र में पेश होगा विधेयक; रायपुर में 200 प्रतिनिधियों से मंथन

विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और दत्तक ग्रहण जैसे मामलों पर बनेगी समान कानूनी व्यवस्था, समिति ने शुरू किया सुझाव लेने का दौर
रायपुर। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) लागू करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पहले ही कह चुके हैं कि सरकार आगामी शीतकालीन सत्र में UCC से संबंधित विधेयक विधानसभा में पेश करेगी। इसके लिए गठित उच्चस्तरीय समिति ने प्रारूप तैयार करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है।
रायपुर में 200 प्रतिनिधियों के साथ हुआ मंथन
27 अगस्त को रायपुर के न्यू सर्किट हाउस स्थित कन्वेंशन हॉल में UCC को लेकर राज्य स्तरीय परिचयात्मक बैठक आयोजित की गई। इसमें विभिन्न आयोगों, निगमों और मंडलों के पदाधिकारियों के साथ धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों, समुदायों, जनप्रतिनिधियों, कानून विशेषज्ञों और प्रबुद्ध नागरिकों को शामिल किया गया। करीब 200 प्रतिनिधियों से प्रस्तावित कानून के सामाजिक प्रभाव और व्यावहारिक पहलुओं पर सुझाव लिए गए।
जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति
छत्तीसगढ़ सरकार ने UCC का प्रारूप तैयार करने के लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की है, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। समिति में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह और एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार तथा ज्योति रानी सिंह सदस्य हैं।
समिति राज्य में लागू व्यक्तिगत कानूनों और संबंधित कानूनी व्यवस्था का अध्ययन कर UCC के लिए सुझाव और प्रारूप तैयार करेगी। इसमें विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और दत्तक ग्रहण जैसे नागरिक मामलों की समीक्षा शामिल है।
सभी वर्गों से सुझाव लेने पर जोर
सरकार और समिति UCC का मसौदा तैयार करने से पहले अलग-अलग सामाजिक और धार्मिक समूहों के साथ संवाद कर रही है। समिति का उद्देश्य विभिन्न समुदायों की सामाजिक परिस्थितियों, अधिकारों और परंपराओं को ध्यान में रखते हुए व्यापक प्रारूप तैयार करना है। नागरिकों, सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं और विधि विशेषज्ञों से भी सुझाव मांगे जा रहे हैं। सार्वजनिक सुझाव लेने की प्रक्रिया 15 अक्टूबर तक जारी रहने की जानकारी सामने आई है।
संविधान के अनुच्छेद 44 को बनाया आधार
समान नागरिक संहिता का उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 44 में किया गया है। इसमें राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास करने का निर्देश दिया गया है। इसी संवैधानिक प्रावधान को आधार बनाकर छत्तीसगढ़ सरकार ने UCC का मसौदा तैयार करने के लिए समिति गठित की है।
UCC में किन मामलों पर हो सकता है समान कानून?
UCC का उद्देश्य व्यक्तिगत नागरिक मामलों में धर्म आधारित अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाओं के स्थान पर एक समान नागरिक कानून की दिशा में बढ़ना है। प्रस्तावित ढांचे में विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और अन्य संबंधित नागरिक मामलों पर विचार किया जा रहा है।
हालांकि, अभी छत्तीसगढ़ का अंतिम UCC कानून तैयार या लागू नहीं हुआ है। इसलिए किन प्रावधानों को अंतिम रूप दिया जाएगा और अलग-अलग समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों पर इसका वास्तविक प्रभाव क्या होगा, यह समिति की सिफारिशों और विधानसभा में पेश होने वाले विधेयक के बाद ही स्पष्ट होगा।
शीतकालीन सत्र पर सरकार की नजर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जुलाई में कहा था कि सरकार आगामी विधानसभा के शीतकालीन सत्र में UCC विधेयक पेश करेगी। ऐसे में समिति की ओर से सुझावों और कानूनी अध्ययन के आधार पर तैयार होने वाला प्रारूप आगे की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।






