रायगढ़ : बढ़ते एसी उपयोग से बदला बिजली का लोड पैटर्न, ट्रांसफॉर्मर और वितरण नेटवर्क पर बढ़ा दबाव

गर्मी में बिजली की मांग पहुंची 60 मेगावाट तक, उपभोक्ताओं द्वारा कम स्वीकृत लोड लेकर अधिक खपत बनी बड़ी चुनौती
रायगढ़। जिले की बदलती जीवनशैली अब बिजली व्यवस्था के लिए नई चुनौती बनती जा रही है। कुछ साल पहले तक जहां बिजली की सबसे अधिक मांग दीपावली के समय देखने को मिलती थी, वहीं अब गर्मी का मौसम बिजली विभाग के लिए सबसे कठिन दौर बन गया है। एयर कंडीशनर और अन्य हाई-पावर उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल से बिजली खपत का पूरा पैटर्न बदल गया है।
सामान्य मांग से लगभग दोगुना पहुंचा बिजली लोड
बिजली विभाग के अनुसार सामान्य दिनों में रायगढ़ जिले की औसत बिजली मांग करीब 35 मेगावाट रहती थी, लेकिन इस वर्ष जुलाई की शुरुआत में ही यह बढ़कर 60 मेगावाट तक पहुंच गई। पिछले वर्ष की तुलना में भी इस बार करीब 10 मेगावाट अधिक बिजली की जरूरत दर्ज की गई है।
कम स्वीकृत लोड में अधिक खपत बनी परेशानी
विभाग की सबसे बड़ी चिंता बढ़ती बिजली मांग के साथ उपभोक्ताओं द्वारा स्वीकृत लोड से अधिक बिजली का उपयोग करना है। कई उपभोक्ता वर्षों पुराने कम लोड वाले कनेक्शन पर एसी, कूलर और अन्य भारी उपकरणों का संचालन कर रहे हैं। इसका सीधा असर ट्रांसफॉर्मर, जंपर और वितरण लाइनों पर पड़ रहा है।
हर महीने बिक रहे करीब 200 नए एसी
बिजली विभाग के मुताबिक रायगढ़ में इस बार हर महीने औसतन करीब 200 नए एयर कंडीशनर की बिक्री हो रही है। लगातार बढ़ते एसी कनेक्शन से बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है। हालांकि मांग के अनुरूप ट्रांसफॉर्मर, लाइन और वितरण क्षमता बढ़ाने में समय लग रहा है।
बिजली की कमी नहीं, क्षमता पर बढ़ रहा दबाव
विभाग का कहना है कि रायगढ़ बिजली उत्पादन के मामले में सक्षम जिला है और बिजली की उपलब्धता में कोई बड़ी समस्या नहीं है। परेशानी केवल वितरण व्यवस्था की क्षमता पर बढ़ते दबाव की है। कई बार ट्रांसफॉर्मर अपनी निर्धारित क्षमता से अधिक लोड झेलने लगते हैं, जिससे फ्यूज उड़ना, जंपर टूटना, लो-वोल्टेज और ट्रांसफॉर्मर खराब होने जैसी समस्याएं सामने आती हैं।
1.70 लाख उपभोक्ताओं में 30 हजार की अधिक खपत
जिले में करीब 1.70 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें लगभग 30 हजार उपभोक्ता ऐसे हैं जिनकी मासिक खपत 200 यूनिट से अधिक है। विभाग का मानना है कि बड़ी संख्या में ऐसे घर हैं जहां एसी और अन्य भारी उपकरणों का उपयोग हो रहा है, लेकिन उनका स्वीकृत लोड अब भी पुराना है।
फॉल्ट के कारण बाधित होती है बिजली आपूर्ति
विभाग के अनुसार अब बिजली कटौती की स्थिति पहले जैसी नहीं है। इलेक्ट्रिसिटी सरप्लस स्टेट होने के कारण उपभोक्ताओं की मांग पूरी की जा रही है। लेकिन तकनीकी खराबी आने पर संबंधित क्षेत्र की बिजली सुरक्षा के लिहाज से बंद करनी पड़ती है। तेज गर्जना के दौरान इंसुलेटर खराब होने जैसी घटनाओं से भी आपूर्ति प्रभावित होती है, जिसे सुधारने में समय लगता है।







