रायगढ़ में बारिश का कहर: पेट्रोल पंप के अंडरग्राउंड टैंक में घुसा गंदा पानी, 25-30 लाख के डीजल नुकसान का दावा

छातामुड़ा बाईपास चौक स्थित सांई सर्विस स्टेशन में जलभराव से बिगड़े हालात, संचालक ने बदहाल ड्रेनेज व्यवस्था को बताया जिम्मेदार
रायगढ़। शहर के जूट मिल थाना क्षेत्र अंतर्गत छातामुड़ा बाईपास चौक स्थित इंडियन ऑयल के सांई सर्विस स्टेशन में गुरुवार दोपहर हुई तेज बारिश के बाद भारी जलभराव की स्थिति निर्मित हो गई। पानी का स्तर बढ़ने के कारण पेट्रोल पंप के भूमिगत हिस्से तक बारिश का गंदा पानी पहुंच गया। संचालक के अनुसार, पानी अंडरग्राउंड डीजल टैंक में प्रवेश कर गया, जिससे बड़ी मात्रा में ईंधन खराब हो गया और करीब 25 से 30 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान है।
30-40 मिनट की बारिश में भर गया पूरा परिसर
मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार दोपहर करीब सवा एक बजे तेज बारिश शुरू हुई। लगभग 30 से 40 मिनट तक हुई झमाझम बारिश के दौरान क्षेत्र में जल निकासी की व्यवस्था प्रभावित हो गई। देखते ही देखते पेट्रोल पंप परिसर में पानी भरने लगा और कुछ ही देर में जलभराव इतना बढ़ गया कि भूमिगत हिस्से तक पानी पहुंच गया।
अंडरग्राउंड डीजल टैंक में पहुंचा पानी
संचालक के मुताबिक, बारिश के पानी के साथ गंदा पानी अंडरग्राउंड डीजल टैंक में चला गया। इसके चलते टैंक में मौजूद डीजल खराब होने की बात कही जा रही है। संचालक ने इससे करीब 25 से 30 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान होने का दावा किया है।
जाम नाले के चेंबर को बताया मुख्य वजह
पेट्रोल पंप संचालक राजू गुप्ता का कहना है कि संत विनोबा क्षेत्र की ओर जाने वाले नाले का चेंबर लंबे समय से जाम है। उनका आरोप है कि बारिश के दौरान इस चेंबर से पानी की निकासी नहीं हो पाती, जिसके कारण पानी वापस पंप परिसर की ओर आ जाता है।
अधिकारियों को पहले दी थी सूचना, कार्रवाई नहीं होने का आरोप
राजू गुप्ता के अनुसार, नाले के जाम चेंबर की समस्या की जानकारी नगर निगम के संबंधित अधिकारियों को पहले ही दी जा चुकी थी। उनके मुताबिक, अधिकारियों की ओर से चेंबर की सफाई के लिए टेंडर जारी करने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक मौके पर अपेक्षित काम नहीं हुआ।
ड्रेनेज व्यवस्था पर उठे सवाल
तेज बारिश के बाद पेट्रोल पंप परिसर में हुए जलभराव और डीजल टैंक तक पानी पहुंचने की घटना ने क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, नुकसान की वास्तविक राशि और टैंक में प्रवेश किए पानी से खराब हुए ईंधन की मात्रा का आधिकारिक आकलन संबंधित विभाग या तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।






