
रायगढ़ | छत्तीसगढ़ में 14 वर्षों से लागू आदर्श पुनर्वास नीति में संशोधन की मांग को लेकर रायगढ़ के समाजसेवी और शिक्षाविद रामचंद शर्मा के नेतृत्व में नव निर्माण संकल्प समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम जिला कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी को ज्ञापन सौंपा। समिति ने नीति को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप अद्यतन कर, किसानों और विस्थापितों के हक में नई जनकल्याणकारी नीति लागू करने की मांग की है।

ज्ञापन में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ की आदर्श पुनर्वास नीति को अंतिम बार 19 मार्च 2010 को संशोधित किया गया था, और यह अब बदलते आर्थिक-सामाजिक परिदृश्य में अप्रासंगिक हो चुकी है। वर्तमान में प्रदेश में बड़े पैमाने पर औद्योगिक परियोजनाएं, कोल ब्लॉक, भारतमाला सड़क परियोजनाएं और रेल विस्तार योजनाएं चल रही हैं, जिनके कारण किसानों की जमीनें अधिग्रहित की जा रही हैं, लेकिन उन्हें 14 साल पुरानी दरों पर मुआवजा मिल रहा है।

समिति ने उठाई यह मांगें
1. मुआवजा दरों में भारी वृद्धि की मांग:
- पड़त भूमि: ₹6 लाख/एकड़ से बढ़ाकर ₹40 लाख/एकड़
- असिंचित (एक फसली) भूमि: ₹8 लाख से ₹50 लाख/एकड़
- सिंचित (दो फसली) भूमि: ₹10 लाख से ₹60 लाख/एकड़
2. पुनर्वास में जीवन स्तर को ध्यान में रखने की मांग:
- प्रभावित परिवारों के हर व्यस्क सदस्य को आवासीय परिसर और रोजगार के साधन सुनिश्चित किए जाएं
- शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध कराई जाएं
- चल-अचल संपत्तियों का मुआवजा बाजार मूल्य से 10 गुना अधिक तय हो
3. अधिग्रहण में समय सीमा और वापसी का प्रावधान:
- 4 वर्ष में कार्य प्रारंभ न होने पर भूमि मूल स्वामी को वापस मिले
- प्रत्येक परिवार को 1000 वर्ग मीटर भूखंड व भवन निर्माण की सुविधा दी जाए
4. पर्यावरण संरक्षण को नीति में शामिल किया जाए:
- जल, जंगल, जीव-जंतु और प्राकृतिक जल स्रोतों की रक्षा के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश हों
- नई परियोजनाओं के भूमि अधिग्रहण पर तब तक रोक लगाई जाए जब तक संशोधित पुनर्वास नीति लागू न हो
राज्यपाल, वित्त मंत्री व अन्य अधिकारियों को भी भेजा गया पत्र
समिति ने ज्ञापन की प्रति राज्यपाल, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग को भी प्रेषित की है। साथ ही रायगढ़ विधायक एवं प्रदेश के वित्त मंत्री से मिलकर इस मुद्दे पर ठोस पहल की मांग की गई है।
“नई नीति से लाखों किसानों को मिलेगा न्याय” – रामचंद शर्मा
रामचंद शर्मा ने कहा कि आज की महंगाई और ज़मीन की बढ़ती कीमतों के मुकाबले वर्तमान मुआवजा राशि बेहद कम है। इससे न केवल किसानों का आर्थिक शोषण हो रहा है, बल्कि पर्यावरण पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा, “यह नीति आदिवासियों, किसानों और आमजन के लिए एक बोझ बन चुकी है। हम चाहते हैं कि सरकार तत्काल नीति में बदलाव कर इसे न्यायोचित और व्यवहारिक बनाए।”












