भारत सरकार ने 11 महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया की रद्द, निवेशक रिस्पांस रहा बेहद ठंडा

नई दिल्ली: भारत सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 11 खनिज ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया को रद्द कर दिया है. यह कदम छठे दौर की नीलामी के दौरान उठाया गया है. नीलामी रद्द होने का मुख्य कारण निवेशकों का कम उत्साह और योग्य बोलीदाताओं की कमी बताया जा रहा है.
नीलामी रद्द होने की मुख्य वजहें
खान मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक नोटिस के अनुसार, नीलामी प्रक्रिया को मुख्य रूप से दो कारणों से रोका गया है, 5 ऐसे खनिज ब्लॉक थे, जिनके लिए एक भी कंपनी ने बोली नहीं लगाई. 5 अन्य ब्लॉकों के लिए नीलामी इसलिए रद्द करनी पड़ी क्योंकि वहां तकनीकी रूप से योग्य बोलीदाताओं की संख्या तीन से कम थी. सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी निष्पक्ष नीलामी के लिए कम से कम तीन योग्य प्रतिस्पर्धियों का होना जरूरी है. इसके अलावा, पश्चिम बंगाल के ‘बेकू रेयर मेटल ब्लॉक’ की नीलामी को भी अलग से रद्द कर दिया गया है.
क्या था सरकार का लक्ष्य?
सरकार ने पिछले साल सितंबर में 13 राज्यों में फैले कुल 23 खनिज ब्लॉकों की नीलामी शुरू की थी. इन राज्यों में आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल थे. इन खदानों में लिथियम, कोबाल्ट, नियोबियम और वैनेडियम जैसे कीमती खनिज मौजूद हैं.
ये खनिज क्यों हैं जरूरी?
आज की आधुनिक दुनिया में ये खनिज ‘भविष्य का सोना’ माने जाते हैं. ये इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बैटरी बनाने, स्मार्टफोन, लैपटॉप, सेमीकंडक्टर और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों के लिए बेहद जरूरी हैं. भारत वर्तमान में इन खनिजों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है. सरकार का लक्ष्य घरेलू स्तर पर इनका खनन बढ़ाकर भारत को आत्मनिर्भर बनाना है.
भले ही छठे दौर में सरकार को निराशा हाथ लगी हो, लेकिन अब तक छह अलग-अलग चरणों में कुल 46 खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी की जा चुकी है. विशेषज्ञों का मानना है कि इन 11 ब्लॉकों में निवेशकों की कम रुचि का कारण वहां मौजूद संसाधनों की सटीक जानकारी का अभाव हो सकता है.






