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धमतरी: मगरलोड ब्लॉक के मोहेरा गांव की पहाड़ियों में विराजमान प्रसिद्ध निरई माता का दरबार चैत्र नवरात्रि के पहले रविवार को श्रद्धालुओं के लिए खोला गया. साल में केवल एक बार खुलने वाले इस दरबार के दर्शन के लिए दूर-दराज क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और माता के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा.
निरई माता के दर्शन करने दूर दूर से पहुंचे श्रद्दालु
सुबह से ही मंदिर परिसर और पहाड़ी मार्गों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं. लोग कई किलोमीटर पैदल चलकर कठिन रास्तों को पार करते हुए माता के दर्शन के लिए पहुंचे. भक्तों की आस्था और उत्साह देखते ही बन रहा था.
कलेक्टर ने भी लाइन में लगकर किए दर्शन
इस अवसर पर धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा भी निरई माता के दरबार पहुंचे. उन्होंने आम श्रद्धालुओं के साथ लाइन में लगकर माता के दर्शन किए और व्यवस्थाओं का जायजा लिया. कलेक्टर ने कहा कि यह स्थल जिले की आस्था का प्रमुख केंद्र है और यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा प्रशासन की प्राथमिकता है.
बिना तेल घी के जलती है दिव्य ज्योत
निरई माता मंदिर को लेकर क्षेत्र में कई अनूठी धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं. मान्यता है कि चैत्र नवरात्रि के दौरान मंदिर में बिना तेल और घी के अपने आप दिव्य ज्योति प्रज्ज्वलित होती है, जिसे माता की कृपा का प्रतीक माना जाता है. यही कारण है कि इस दरबार को चमत्कारी स्थल के रूप में भी देखा जाता है.
महिलाओं का प्रवेश और प्रसाद ग्रहण करना वर्जित
मंदिर से जुड़ी एक विशेष परंपरा यह भी है कि यहां महिलाओं का प्रवेश और प्रसाद ग्रहण करना वर्जित माना जाता है, जिसका स्थानीय श्रद्धालु वर्षों से पालन करते आ रहे हैं. भक्त यहां गुलाल या अन्य सजावटी सामग्री नहीं चढ़ाते, बल्कि केवल नींबू, नारियल और अगरबत्ती अर्पित कर माता से सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं.
साल में सिर्फ एक दिन खुलता का निरई माता मंदिर
बताया जाता है कि निरई माता का दरबार साल में सिर्फ एक दिन, वह भी लगभग 5 से 6 घंटे के लिए ही पूजा-अर्चना हेतु खोला जाता है. इसी वजह से इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है और श्रद्धालु पूरे वर्ष इस अवसर का इंतजार करते हैं. हर वर्ष बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या इस बात का प्रमाण है कि निरई माता के प्रति लोगों की आस्था लगातार मजबूत होती जा रही है. दूर-दूर से आने वाले भक्त यहां दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस करते हैं और माता के आशीर्वाद के साथ लौटते हैं. निरई माता का यह वार्षिक दरबार न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि धमतरी जिले की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है.
धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि निरई माता दरबार का अनुभव बेहद अद्भुत रहा. यह दरबार वर्ष में केवल एक बार खुलता है. जिले के अंतिम छोर स्थित मोहेरा गांव में निरई माता मंदिर में इस बार लगभग 30 से 40 हजार श्रद्धालु पहुंचे, जिनकी आस्था देखने योग्य रही.
कलेक्टर ने बताया कि वे अपनी टीम के साथ यहां पहुंचे थे और प्रशासन की ओर से सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थीं. उन्होंने कहा कि निरई माता मंदिर में अभी कई विकास कार्य किए जाने बाकी हैं, जिनका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है. मंदिर क्षेत्र में बोरवेल और सड़क जैसी मूलभूत मांगों को प्रशासन स्तर पर पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है. कलेक्टर ने बताया कि जिला प्रशासन की तरफ से हाईमास्ट लाइट और शेड निर्माण जैसे कार्य कराए जा चुके हैं. आगे भी प्राप्त मांगों के अनुसार सुविधाएं विकसित की जाएंगी. कलेक्टर ने दर्शन के बाद धमतरी जिले की खुशहाली, विकास और निरंतर प्रगति के लिए प्रार्थना करने की बात कही.
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